गुमला ट्रेजरी से वेतन मद में ₹28.39 लाख की संदिग्ध निकासी का मामला सामने आया, जिसके बाद वित्त विभाग ने नोटिस जारी कर जांच तेज कर दी।

गुमला वेतन घोटाला: ट्रेजरी से ₹28.39 लाख की संदिग्ध निकासी उजागर, जांच में असहयोग पर उठे सवाल

Team The420
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गुमला। झारखंड के गुमला जिले में वेतन मद से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। महालेखाकार द्वारा आईएफएमएस (Integrated Financial Management System) डेटा की समीक्षा के दौरान गुमला ट्रेजरी से ₹28.39 लाख की संदिग्ध और कथित अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। यह लेन-देन वर्ष 2017 से 2025 के बीच अलग-अलग चरणों में किए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चिंता बढ़ गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से तत्काल विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। इसके लिए डीएसई समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र जारी कर पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कर रिपोर्ट मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया गया है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

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जांच प्रक्रिया के तहत जिन डीडीओ (Drawing and Disbursing Officers) और अन्य अधिकारियों को चिन्हित किया गया है, उनमें डीएसपी बीरेंद्र टोप्पो, घनश्याम चौबे (GMS पतराटोली) और प्रियाश्री भगत (गवर्नमेंट मिडिल स्कूल मोरहाटोली) शामिल हैं। इन सभी से संबंधित वित्तीय लेन-देन और वेतन भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

इसी बीच वित्त विभाग ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। 28 अप्रैल 2026 को जारी पत्रांक 249 के माध्यम से गुमला के ट्रेजरी अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और 24 घंटे के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि जिला स्तरीय जांच समिति के साथ असहयोग की शिकायत गंभीर लापरवाही है।

इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए डीआरडीए निदेशक विद्याभूषण कुमार की अध्यक्षता में एक जिलास्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। समिति का उद्देश्य वेतन मद से हुई कथित फर्जी निकासी की पूरी परतें खोलना है। जांच के दौरान समिति ने वित्त विभाग को भेजे अपने पत्र में आरोप लगाया है कि ट्रेजरी अधिकारी जांच प्रक्रिया में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे हैं, जिससे संदेह और गहरा हो रहा है।

समिति ने यह भी आशंका जताई है कि जांच में असहयोग के पीछे किसी वित्तीय अनियमितता को छिपाने का प्रयास हो सकता है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि महालेखाकार के इनपुट के बाद जब जांच शुरू की गई, तब यह 28.39 लाख रुपये की संदिग्ध निकासी सामने आई।

वित्त विभाग ने इस रवैये को गंभीर अनुशासनहीनता और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना माना है। विभाग ने ट्रेजरी अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जांच में पूरा सहयोग करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। साथ ही चेतावनी भी दी गई है कि किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल एक वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि एक संभावित व्यवस्थित अनियमितता की ओर संकेत कर रहा है, जिसमें कई वर्षों तक वेतन भुगतान प्रणाली में हेरफेर किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और प्रशासनिक मशीनरी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि यह अवैध निकासी किन परिस्थितियों में और किन लोगों की संलिप्तता से की गई। जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि इसमें वास्तविक दोषी कौन हैं और उन पर क्या कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रकरण ने जिले की वित्तीय निगरानी प्रणाली और ट्रेजरी प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि प्रशासन अब पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश में लगा है।

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