श्योपुर में 2021 बाढ़ राहत वितरण में 960 किसानों के मुआवजे को लेकर गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ, जिसमें तहसीलदार जांच के दायरे में हैं।

केबीसी विजेता तहसीलदार पर शिकंजा: 960 किसानों के मुआवजे में भारी गड़बड़ी का खुलासा

Team The420
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भोपाल। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में वर्ष 2021 की बाढ़ राहत वितरण से जुड़ा मामला अब बड़े घोटाले का रूप लेता दिख रहा है। जांच एजेंसियों की शुरुआती रिपोर्ट में 960 से अधिक प्रभावित किसानों के मुआवजे में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिसमें राहत राशि के एक बड़े हिस्से के लाभार्थियों तक न पहुंचकर संदिग्ध खातों में स्थानांतरित होने की आशंका जताई गई है।

ललितपुरा सहित कई गांवों के किसानों को बाढ़ के दौरान भारी नुकसान हुआ था। कई किसानों ने घर, पशुधन और कृषि भूमि के नुकसान की सूचना दी थी। लेकिन मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में भारी असमानता सामने आई है। जांच में पाया गया कि कई पात्र किसानों को या तो आंशिक भुगतान मिला या उनका भुगतान रिकॉर्ड ही नहीं मिला।

इस पूरे मामले में तहसीलदार अमिता सिंह तोमर का नाम सामने आया है, जो पहले एक टेलीविजन क्विज शो में 50 लाख रुपये जीतकर चर्चा में आई थीं। अब उन्हें इस कथित राहत वितरण अनियमितता मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल बताया जा रहा है।

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प्रारंभिक जांच के अनुसार, राहत राशि के वितरण में ऐसे बैंक खातों में ट्रांजैक्शन किए जाने के संकेत मिले हैं, जिनका सीधे लाभार्थियों से कोई स्पष्ट संबंध नहीं पाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह पैटर्न किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसने राहत प्रणाली की खामियों का फायदा उठाकर वित्तीय हेरफेर किया।

जांच एजेंसियां अब बैंकिंग ट्रांजैक्शन, डीडीओ कोड, और प्रशासनिक फाइलों की गहन समीक्षा कर रही हैं। आईएफएमएस (Integrated Financial Management System) के डिजिटल रिकॉर्ड और मैनुअल दस्तावेजों के बीच भी कई विसंगतियां पाई गई हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है।

वित्त विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त जांच समिति का गठन किया है, जो सभी संबंधित भुगतान आदेशों, बैंक स्टेटमेंट और बजटीय आवंटन की विस्तृत जांच कर रही है। समिति को आशंका है कि यह मामला केवल एक जिले तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसमें कई स्तरों पर मिलीभगत की संभावना है।

ग्रामीण क्षेत्रों के प्रभावित किसानों का आरोप है कि मुआवजा वितरण में भारी अनियमितता हुई है और कई वास्तविक लाभार्थियों को आज तक उनका पूरा हक नहीं मिला है। कुछ किसानों का कहना है कि उन्हें नाम सूची में शामिल होने के बावजूद भुगतान नहीं मिला, जबकि कुछ मामलों में राशि किसी और खाते में पहुंच गई।

जांच अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल सभी ट्रांजैक्शन का डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि किस स्तर पर गड़बड़ी हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। शुरुआती निष्कर्ष बताते हैं कि यह मामला एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत लंबे समय तक चलने वाली वित्तीय अनियमितता हो सकता है।

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, गड़बड़ी के माध्यम से ट्रांसफर की गई राशि की रिकवरी पर भी विचार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सरकारी राहत योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। डिजिटल सिस्टम होने के बावजूद अगर डेटा में हेरफेर संभव है, तो यह निगरानी ढांचे की कमजोरियों को दर्शाता है।

फिलहाल पूरा मामला जांच के अधीन है और प्रशासनिक तथा वित्तीय एजेंसियां मिलकर यह पता लगाने में जुटी हैं कि 960 किसानों की राहत राशि में हुई इस कथित गड़बड़ी की वास्तविक जड़ कहां है और इसमें कितनी बड़ी राशि प्रभावित हुई है।

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