बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बगहा क्षेत्र में साइबर ठगों ने ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका अपनाया है, जिसमें खास तौर पर शिक्षकों को निशाना बनाया जा रहा है। “मोबाइल नंबर पोर्टिंग” के जरिए हो रही इस धोखाधड़ी में ठग पहले पीड़ित का मोबाइल नंबर अपने नियंत्रण में लेते हैं और फिर उससे जुड़े बैंक खातों तक पहुंच बनाकर पैसे उड़ा देते हैं।
साइबर थाना बगहा के पास पिछले कुछ महीनों में इस तरह की कई शिकायतें पहुंची हैं, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित साइबर अपराध का हिस्सा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन और शिक्षा विभाग को भी अलर्ट कर दिया गया है।
फर्जी कॉल से शुरू होता है पूरा खेल
जांच में सामने आया है कि ठग शिक्षकों को फोन कॉल करते हैं और खुद को शिक्षा विभाग का अधिकारी बताते हैं। वे किसी जरूरी प्रक्रिया, अपडेट या सत्यापन के नाम पर जानकारी मांगते हैं और बातचीत के दौरान पीड़ित को विश्वास में ले लेते हैं।
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इसके बाद ठग मोबाइल नंबर को दूसरी टेलीकॉम कंपनी में पोर्ट कराने की प्रक्रिया शुरू कर देते हैं। कई बार वे पीड़ित से OTP या अन्य जरूरी जानकारी भी हासिल कर लेते हैं, जिससे नंबर पोर्टिंग आसानी से पूरी हो जाती है।
जैसे ही नंबर ठगों के नियंत्रण में आता है, वे उससे जुड़े बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट और अन्य सेवाओं तक पहुंच बना लेते हैं।
नंबर पोर्ट होते ही खाते पर कब्जा
मोबाइल नंबर किसी भी बैंक खाते से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम होता है, क्योंकि OTP और अलर्ट उसी पर आते हैं। जैसे ही नंबर पोर्ट होता है, असली खाताधारक के पास कंट्रोल खत्म हो जाता है।
ठग इसके बाद बैंकिंग सेवाओं में लॉगिन करने, पासवर्ड रीसेट करने और OTP के जरिए ट्रांजैक्शन को अंजाम देने लगते हैं। कई मामलों में पीड़ित को तब तक भनक नहीं लगती, जब तक खाते से पैसे निकल नहीं जाते।
यह तरीका इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें सीधे बैंक डिटेल्स चुराने की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि मोबाइल नंबर के जरिए पूरा सिस्टम अपने नियंत्रण में ले लिया जाता है।
शिक्षकों को क्यों बनाया जा रहा निशाना
जांच एजेंसियों के अनुसार, शिक्षकों को इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि उनके डेटा तक पहुंच कई बार सार्वजनिक या अर्ध-सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर होती है। इसके अलावा ठग यह मानकर चलते हैं कि सरकारी प्रक्रियाओं के नाम पर शिक्षक आसानी से भरोसा कर सकते हैं।
शिक्षा विभाग से जुड़े नाम और पद का इस्तेमाल कर ठग कॉल को विश्वसनीय बनाते हैं, जिससे पीड़ित बिना ज्यादा जांच-पड़ताल के निर्देशों का पालन कर लेता है।
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
मामले को गंभीरता से लेते हुए साइबर थाना ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर शिक्षकों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रखंड स्तर पर बैठक आयोजित कर इस तरह की ठगी से बचने के उपाय बताए जाने की तैयारी है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और पहले उसकी सत्यता की जांच करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर थाना या स्थानीय पुलिस को देने की अपील की गई है।
कैसे बचें मोबाइल पोर्टिंग फ्रॉड से
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल नंबर पोर्टिंग से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया के लिए हमेशा आधिकारिक चैनल का ही इस्तेमाल करें। अगर अचानक नेटवर्क बंद हो जाए या सिम काम करना बंद कर दे, तो तुरंत अपने सेवा प्रदाता से संपर्क करें।
OTP, बैंक डिटेल्स या सिम से जुड़ी कोई भी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अपने मोबाइल नंबर पर आने वाले हर मैसेज को ध्यान से पढ़ें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें।
निष्कर्ष: सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
बगहा का यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। मोबाइल नंबर पोर्टिंग जैसे तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर वे सीधे बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं।
ऐसे में जरूरी है कि लोग सतर्क रहें, हर कॉल और मैसेज को गंभीरता से परखें और किसी भी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले पूरी जांच करें। डिजिटल युग में सुरक्षा का सबसे मजबूत हथियार जागरूकता ही है।
