IPL सट्टेबाजी रैकेट में ‘प्रोफेसर’ के नाम से चल रहे नेटवर्क का खुलासा, BetHub24 ऐप, म्यूल अकाउंट और करोड़ों की नकदी बरामद।

IPL सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़: ‘प्रोफेसर’ के नाम से मशहूर सरगना का नेटवर्क बेनकाब, कई राज्यों में फैला गिरोह

Team The420
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कानपुर/जबलपुर। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) मैचों के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें देशभर में फैले संगठित नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का सरगना जबलपुर का रहने वाला मनीष है, जिसे नेटवर्क में ‘प्रोफेसर’ के नाम से जाना जाता है और वह महाराष्ट्र से पूरे ऑपरेशन को संचालित कर रहा था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह गिरोह मोबाइल ऐप और वेबसाइट्स के जरिए सट्टेबाजी का नेटवर्क चला रहा था। अलग-अलग शहरों में एजेंट बनाए गए थे, जिन्हें यूजर आईडी और पासवर्ड दिए जाते थे, ताकि वे स्थानीय स्तर पर ग्राहकों को जोड़कर सट्टा खिलवा सकें। यह पूरा सिस्टम डिजिटल और कैश—दोनों मोड में संचालित किया जा रहा था।

ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म से चलता था नेटवर्क

पकड़े गए आरोपितों के मोबाइल फोन की जांच में ‘BetHub24’ जैसे ऐप्स और कई सट्टेबाजी वेबसाइट्स के लिंक मिले हैं। साथ ही, व्हाट्सएप चैट, ट्रांजैक्शन डिटेल्स और ग्राहकों से जुड़ी जानकारी भी बरामद हुई है।

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जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के सदस्य ऑनलाइन आईडी बनाकर देशभर के लोगों को उपलब्ध कराते थे, जिसके जरिए वे लाइव मैचों पर सट्टा लगाते थे। IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट के दौरान इस तरह की गतिविधियां तेजी से बढ़ जाती हैं, जिसका फायदा यह नेटवर्क उठा रहा था।

कैश कैरियर्स और म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल

गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद संगठित और सुनियोजित थी। सट्टे से आने वाली रकम को संभालने के लिए ‘कैश कैरियर्स’ तैनात किए गए थे, जिन्हें मासिक वेतन दिया जाता था। जांच में सामने आया कि कल्पेश, रवि नाई और विष्णु नाम के तीन सदस्य इस काम में लगे थे और उन्हें ₹13,000 से ₹20,000 तक की सैलरी दी जाती थी।

इसके अलावा, लेन-देन को छिपाने के लिए म्यूल अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता था। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं, जिनका इस्तेमाल असली पहचान छिपाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। इसी नेटवर्क के जरिए सट्टे की रकम को विभिन्न खातों में घुमाया जाता था, ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो सके।

₹1 लाख तक ऑनलाइन, उससे ज्यादा कैश में लेन-देन

जांच एजेंसियों ने बताया कि गिरोह ₹1 लाख तक की रकम का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करता था, जबकि इससे ज्यादा रकम नकद में ली जाती थी। खास बात यह भी सामने आई कि जब कोई व्यक्ति ₹1 लाख से ज्यादा का सट्टा लगाता था, तो ऐप के जरिए उसे तकनीकी रूप से हरा दिया जाता था, जिससे गिरोह को निश्चित लाभ मिल सके।

इस तरह का मैकेनिज्म दिखाता है कि यह केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि एक नियंत्रित और हेरफेर आधारित सिस्टम था, जिसमें खिलाड़ियों को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया जाता था।

नोट गिनने और नकली नोट पकड़ने की मशीनें बरामद

छापेमारी के दौरान मौके से भारी मात्रा में नकदी भी बरामद की गई। इसमें ₹500 के 146 बंडल, ₹200 के 21 बंडल और ₹100 के 11 बंडल शामिल हैं। इसके अलावा, आरोपितों के पास नोट गिनने की मशीनें भी मिलीं, जिन्हें दिल्ली से खरीदा गया था।

जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने नकली नोटों की पहचान के लिए विशेष मशीनें भी रखी थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे बड़े स्तर पर कैश हैंडलिंग कर रहे थे और हर जोखिम को ध्यान में रखकर तैयारी की गई थी।

इनकम टैक्स विभाग को सौंपी गई जानकारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी जानकारी आयकर विभाग को भी सौंप दी गई है। अब विभाग इन लेन-देन की जांच करेगा और यह पता लगाएगा कि अवैध कमाई को किस तरह छिपाया गया।

यदि बरामद रकम पर कोई व्यक्ति दावा करता है, तो उस पर आयकर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। इससे यह साफ है कि मामला केवल सट्टेबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय अनियमितताओं की व्यापक जांच होगी।

साइबर और फाइनेंशियल फ्रॉड का नया ट्रेंड

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के रैकेट पारंपरिक अपराध और साइबर तकनीकों के मिश्रण का उदाहरण हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, फर्जी अकाउंट और कैश नेटवर्क के जरिए अपराधियों ने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जिसे पकड़ना आसान नहीं होता।

यह मामला साफ संकेत देता है कि डिजिटल युग में अपराध भी तेजी से विकसित हो रहे हैं। ऐसे में केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। IPL जैसे बड़े इवेंट्स के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी के जाल से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

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