बेलगावी के कारोबारी से फर्जी CBI अधिकारी बनकर ठगी; आरोपियों ने मनी ट्रेल में फर्स्ट-लेयर अकाउंट होल्डर की भूमिका निभाई

₹15.45 करोड़ ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का भंडाफोड़: हैदराबाद में दो गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार

Roopa
By Roopa
5 Min Read

बेंगलुरु/हैदराबाद: कर्नाटक साइबर क्राइम पुलिस ने ₹15.45 करोड़ के बड़े ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड मामले में हैदराबाद से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला एक बेलगावी के कारोबारी को फर्जी CBI अधिकारी बनकर डराने-धमकाने और उसे कथित मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की झूठी कहानी रचकर भारी रकम ट्रांसफर कराने से जुड़ा है। इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अभी फरार बताया जा रहा है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल के जरिए “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया और उसे यह विश्वास दिलाया गया कि उसके खिलाफ गंभीर जांच चल रही है और किसी भी समय गिरफ्तारी हो सकती है। इसी डर और दबाव के कारण कारोबारी ने अलग-अलग बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए।

फर्जी CBI अधिकारी बनकर रची गई साजिश

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने खुद को वरिष्ठ CBI अधिकारी बताकर एक संगठित फर्जी जांच का नाटक रचा। उन्होंने पीड़ित को यह कहकर मानसिक दबाव बनाया कि उसका नाम एक कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सामने आया है। इस दौरान पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल पर रखा गया और किसी भी तरह के विरोध पर तुरंत गिरफ्तारी की धमकी दी गई।

जांच में यह भी सामने आया कि ठगों ने अपने झांसे को मजबूत करने के लिए कुछ हाई-प्रोफाइल नामों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया, ताकि पीड़ित पर भरोसा और डर दोनों बनाया जा सके।

₹15.45 करोड़ की ठगी और मनी ट्रेल का खुलासा

यह मामला 18 मार्च को बेलगावी सिटी साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने हैदराबाद में ऑपरेशन चलाकर दो आरोपियों—वेंकटेश शरथ नायक और देगावत श्रीपदा नायक—को गिरफ्तार किया।

अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपी इस पूरे नेटवर्क में “फर्स्ट-लेयर अकाउंट होल्डर” की भूमिका निभा रहे थे। इनके खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने और आगे अन्य खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था, ताकि पूरे पैसे के लेन-देन को छिपाया जा सके और ट्रेसिंग मुश्किल हो जाए।

दोनों आरोपियों को 7 अप्रैल को अदालत में पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें आगे की पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।

बढ़ता ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम का खतरा

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम देश में तेजी से बढ़ता हुआ नया साइबर अपराध है। इसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें मानसिक रूप से बंधक बनाकर पैसे वसूलते हैं।

इस तरह के मामलों में पीड़ित को यह भरोसा दिलाया जाता है कि वह किसी गंभीर अपराध में शामिल है, जबकि वास्तविकता में कोई केस मौजूद नहीं होता।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

विशेषज्ञ की चेतावनी: डर का मनोविज्ञान बना हथियार

प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह ने इस तरह के मामलों पर चेतावनी देते हुए कहा है कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीक ही नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

उनके अनुसार, अपराधी फर्जी कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी की धमकी और लगातार निगरानी जैसे तरीकों से पीड़ित को तुरंत निर्णय लेने के लिए मजबूर कर देते हैं। ऐसे में लोग डर के कारण बिना सत्यापन के पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रकम की रिकवरी बेहद मुश्किल हो जाती है।

कई राज्यों में फैले नेटवर्क की आशंका

जांच एजेंसियों को शक है कि यह गिरोह केवल कर्नाटक और तेलंगाना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। पुलिस बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स के आधार पर पूरे सिंडिकेट की पहचान करने में जुटी है।

अधिकारियों ने बताया कि मास्टरमाइंड की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

निष्कर्ष

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह तकनीक और डर के संयोजन से बड़े पैमाने पर ठगी कर रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन “गिरफ्तारी” या जांच के नाम पर पैसे न भेजें और ऐसी किसी भी सूचना को तुरंत आधिकारिक माध्यम से सत्यापित करें तथा साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें।

हमसे जुड़ें

Share This Article