“तेज डिजिटल पेमेंट सिस्टम बना नया निशाना; फर्जी पहचान, म्यूल अकाउंट और हाई-वैल्यू स्कैम से बढ़ा खतरा, ₹22,931 करोड़ का नुकसान”

रेउना कांड: झोपड़ियों में चल रहा था ‘नाइट कॉल सेंटर’, 6 महीने में ₹40 लाख की साइबर ठगी का खुलासा

Roopa
By Roopa
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कानपुर: रेउना क्षेत्र में साइबर अपराध का एक बड़ा और चौंकाने वाला नेटवर्क सामने आया है, जहां गांवों की झोपड़ियों और खंडहरनुमा मकानों को ठगी के ‘नाइट कॉल सेंटर’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि पिछले छह महीनों में 12 बैंक खातों के जरिए करीब ₹40 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन किया गया, जिसमें से लगभग ₹10 लाख रुपये फ्रीज कर दिए गए हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क ग्रामीण इलाकों में सक्रिय म्यूल अकाउंट्स के जरिए संचालित हो रहा था। इन खातों को रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के नाम पर खुलवाया गया था, ताकि बैंकिंग निगरानी और डिजिटल ट्रैकिंग से बचा जा सके।

12 खातों से शुरू होकर 40 लाख तक पहुंचा ठगी का खेल

पुलिस जांच में सामने आया है कि ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बैंकों के खातों का इस्तेमाल इस ठगी में किया गया। अब तक 12 से अधिक खातों की पहचान की जा चुकी है, जिनसे करीब ₹40 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए।

इसके बाद इन पैसों को 40 से अधिक अन्य खातों में घुमाया गया, जिससे पूरे लेनदेन को ट्रेस करना मुश्किल हो गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड सिस्टम था, जिसे पूरी योजना के तहत चलाया जा रहा था।

झोपड़ियों में रातभर चलता था ‘कॉलिंग ऑपरेशन’

जांच में यह भी सामने आया है कि घाटमपुर और कानपुर देहात के कई गांवों में झोपड़ियों और खंडहरनुमा मकानों को ठगी का अड्डा बनाया गया था। यहां रात के समय कॉलिंग ऑपरेशन चलता था, जिसमें युवकों की टीमें लोगों को फोन कर निवेश, लोन या अन्य बहानों से ठगी के जाल में फंसाती थीं।

छापेमारी के दौरान इन जगहों से चूल्हा, शराब की बोतलें, नमकीन के पैकेट और अन्य संदिग्ध वस्तुएं भी बरामद की गई हैं। इससे संकेत मिला है कि आरोपी लंबे समय तक वहीं रहकर पूरी ठगी की योजना को अंजाम दे रहे थे।

म्यूल खातों से छिपाया जाता था पूरा लेनदेन

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने स्थानीय लोगों के नाम पर कई म्यूल अकाउंट्स खुलवाए थे। इन खातों का इस्तेमाल केवल ठगी की रकम को रिसीव करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

कई खातों को खुद गिरोह के सदस्य ऑनलाइन ऑपरेट करते थे, जिससे पैसा तेजी से अलग-अलग खातों में भेजा जा सके और जांच एजेंसियों को ट्रैकिंग में कठिनाई हो।

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बैंक में पहुंची महिला से पूछताछ, खाता पहले ही फ्रीज

जांच के दौरान उस समय स्थिति और गंभीर हो गई जब एक महिला संदिग्ध बैंक खाते से पैसे निकालने बैंक पहुंची। बैंक अधिकारियों ने खाता पहले ही फ्रीज किया हुआ पाया और तुरंत पुलिस को सूचना दी।

महिला को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया, हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया। जांच में पता चला कि यह खाता पहले से गिरफ्तार एक आरोपी के नाम पर था, जिसमें करीब ₹6.5 लाख रुपये जमा थे।

सरगना की तलाश में पुलिस, गांवों में बढ़ी निगरानी

पुलिस जांच में गिरोह का मुख्य सरगना सुशील कुमार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। साथ ही यह भी सामने आया है कि गिरोह के कुछ सदस्य कानपुर देहात के गांवों में सक्रिय हैं।

इन इलाकों में पहले भी इसी तरह के साइबर फ्रॉड नेटवर्क पकड़े जा चुके हैं, जिसके बाद पुलिस ने अब दोबारा निगरानी और चेकिंग बढ़ा दी है।

जांच में सामने आ सकते हैं और बड़े खुलासे

अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ कुछ गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा और संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल ट्रांजेक्शन की गहन जांच की जा रही है।

जांच एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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