लखनऊ/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में मुद्रा लोन योजना के नाम पर हुए एक बड़े बैंकिंग घोटाले का खुलासा करते हुए एसटीएफ ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के शाखा प्रबंधक नितिन चौधरी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह एक संगठित गिरोह का हिस्सा था, जिसने फर्जी दस्तावेजों और एडिटेड पहचान पत्रों के जरिए 100 से अधिक लोगों के नाम पर लोन स्वीकृत कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी की।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था और इसमें बैंक कर्मियों के साथ-साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले लोग भी शामिल थे। गिरोह ने लंबे समय तक सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर सरकारी योजना का दुरुपयोग किया।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी नितिन चौधरी मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है और वर्तमान में दिल्ली स्थित बैंक शाखा में कार्यरत था। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन, आधार कार्ड, क्रेडिट कार्ड, मेट्रो कार्ड और नकदी बरामद की गई है। बरामद डिजिटल उपकरणों से कई अहम सबूत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
100 से अधिक फर्जी लोन खातों का खेल
जांच में सामने आया है कि गिरोह ने अलग-अलग राज्यों के नाम पर 100 से अधिक लोगों के फर्जी प्रोफाइल तैयार किए और उनके नाम पर मुद्रा लोन पास करवाए। इन लोन की राशि बाद में गिरोह द्वारा नियंत्रित खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी और फिर आपस में बांट ली जाती थी।
अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया था कि शुरुआती जांच में दस्तावेज सही लगें और बैंकिंग प्रक्रिया में कोई शक न हो।
फोटो एडिटिंग से लेकर फर्जी कंपनियों तक का जाल
पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने बताया कि आधार और पैन कार्ड पर लगी तस्वीरों को एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से बदल दिया जाता था ताकि असली पहचान छिपाई जा सके। इसके बाद उन पहचान पत्रों के आधार पर फर्जी कंपनियां बनाई जाती थीं और उन्हीं के नाम पर लोन अप्रूव कराया जाता था।
लोन पास होने के बाद रकम को अलग-अलग शेल खातों में घुमाकर निकाल लिया जाता था, जिससे ट्रांजेक्शन ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
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संगठित गिरोह का मास्टरमाइंड पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में जांच एजेंसियां पहले ही गिरोह के चार अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड आमिर एहसान है, जिसे फरवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद लगातार इस नेटवर्क की परतें खुलती गईं और बैंकिंग सिस्टम में हुई गड़बड़ियों का बड़ा खुलासा हुआ।
बैंकिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल
इस घोटाले के सामने आने के बाद बैंकिंग सिस्टम की आंतरिक निगरानी और लोन स्वीकृति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ बैंक कर्मियों की मिलीभगत से ही इतने बड़े पैमाने पर फर्जी लोन पास किए जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन डेटा की गहन जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
जांच आगे बढ़ी, और गिरफ्तारी की संभावना
एसटीएफ ने संकेत दिए हैं कि इस घोटाले में अभी और लोग शामिल हो सकते हैं। बैंकिंग और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई संदिग्ध खातों की पहचान की जा रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
फिलहाल आरोपी नितिन चौधरी से पूछताछ जारी है और उसके डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक बैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े और भी नेटवर्क सामने आ सकते हैं।
