नई दिल्ली: होमबायर्स से जुड़े एक बड़े धोखाधड़ी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली-एनसीआर में बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग ₹6.3 करोड़ नकद और ₹7.5 करोड़ मूल्य की ज्वेलरी जब्त की है। यह कार्रवाई एक रियल एस्टेट कंपनी Earth Infrastructures Ltd (EIL) के खिलाफ की गई है, जिस पर हजारों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं।
जानकारी के अनुसार, ईडी ने यह कार्रवाई शुक्रवार को शुरू की, जिसके तहत दिल्ली और गुरुग्राम में कंपनी के पूर्व निदेशकों, प्रमोटरों और उनसे जुड़े संस्थानों के लगभग 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, आभूषण, चांदी की ईंटें और लग्जरी घड़ियां बरामद हुईं।
यह पूरा मामला प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज जांच से जुड़ा है, जो दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की पांच एफआईआर और कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय की जांच एजेंसी SFIO की शिकायतों के आधार पर शुरू हुआ था।
ईडी अधिकारियों के अनुसार, Earth Infrastructures Ltd पर आरोप है कि कंपनी ने दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ में कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लॉन्च किए और समय पर फ्लैट या यूनिट देने का वादा कर निवेशकों से भारी मात्रा में पैसा जुटाया। इनमें Earth Towne, Earth Sapphire Court, Earth Copia, Earth Techone, Earth Iconic, Earth Titanium, Earth Elacasa, Earth Gracia और Earth Skygate जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।
जांच में सामने आया है कि कंपनी और उससे जुड़ी संस्थाओं ने लगभग 19,425 होमबायर्स और निवेशकों से करीब ₹2,024.45 करोड़ की राशि जुटाई। निवेशकों को समय पर घर देने और निश्चित रिटर्न का वादा किया गया था, लेकिन कई परियोजनाएं या तो अधूरी रह गईं या खरीदारों को कब्जा नहीं दिया गया।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
ईडी का आरोप है कि भारी मात्रा में जुटाई गई इस राशि का दुरुपयोग किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, फंड्स को जमीन खरीदने, रियल एस्टेट विस्तार, अन्य शहरों में निवेश और शेल कंपनियों के जरिए ट्रांसफर किया गया। कई मामलों में पैसे को अलग-अलग कंपनियों में घुमा कर वित्तीय ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई।
छापेमारी के दौरान जब्त की गई संपत्तियों में ₹6.3 करोड़ नकद के अलावा लगभग ₹7.5 करोड़ की ज्वेलरी, चांदी के बिस्किट और महंगी घड़ियां शामिल हैं। ईडी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को समझने और आगे की संपत्तियों का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण है।
यह मामला 2018 से कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) के तहत भी चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद निवेशकों की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं, जिसके बाद जांच को और तेज किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस पूरे घोटाले में प्रमोटरों और पूर्व निदेशकों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि निवेशकों से जुटाई गई राशि कहां-कहां और किस माध्यम से ट्रांसफर की गई।
ईडी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में और भी संपत्तियां जब्त हो सकती हैं और कई अन्य ठिकानों पर छापेमारी की संभावना है। फिलहाल जांच एजेंसी फंड डायवर्जन और मनी ट्रेल को ट्रेस करने में जुटी है।
इस कार्रवाई के बाद होमबायर्स के बीच उम्मीद जगी है कि लंबे समय से अटकी हुई उनकी शिकायतों पर अब ठोस कार्रवाई हो सकती है। वहीं, इस केस ने एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
