लखनऊ: उत्तर प्रदेश ने साइबर फ्रॉड से जुड़े फंड फ्रीज करने में देश के बड़े राज्यों में शीर्ष स्थान हासिल किया है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच राज्य में ₹425.7 करोड़ की राशि लियन मार्किंग के जरिए फ्रीज की गई। इस उपलब्धि का श्रेय मुख्य रूप से लखनऊ में स्थापित Cyber Fraud Mitigation Centre (CFMC) को दिया जा रहा है, जिसने डिजिटल वित्तीय अपराधों पर रियल-टाइम कार्रवाई को काफी मजबूत किया है।
अधिकारियों के अनुसार, जुलाई 2025 में स्थापित CFMC ने साइबर ठगी के मामलों में तेजी से प्रतिक्रिया देकर ठगी की रकम को mule accounts के जरिए आगे ट्रांसफर होने से रोकने में अहम भूमिका निभाई है। यह सेंटर साइबर पुलिस, बैंकों और पेमेंट गेटवे के साथ मिलकर काम करता है, ताकि शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जा सके।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 में उत्तर प्रदेश में 29,534 साइबर फ्रॉड शिकायतें दर्ज हुईं, जो सभी बड़े राज्यों में सबसे अधिक हैं। इन मामलों में कुल ₹110.42 करोड़ की ठगी की शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से ₹41.10 करोड़ को तुरंत फ्रीज कर लिया गया। इसके साथ राज्य की लियन-मार्किंग दक्षता 37.2% तक पहुंच गई, जो देश में सबसे अधिक है।
तुलनात्मक रूप से देखें तो उत्तर प्रदेश ने गुजरात से लगभग दो प्रतिशत अंक की बढ़त हासिल की है और बड़े राज्यों के औसत 31.1% से भी 6.1 प्रतिशत अंक आगे है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल साइबर अपराधों की अधिक संख्या नहीं, बल्कि मजबूत और तेज प्रतिक्रिया प्रणाली का परिणाम भी है।
CFMC एक 30-सीट वाले समर्पित साइबर कॉल सेंटर के रूप में कार्य करता है और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 के साथ समन्वय में काम करता है। इसे इसलिए शुरू किया गया था क्योंकि साइबर ठग कुछ ही मिनटों में पैसे को कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
लखनऊ में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में CFMC के प्रदर्शन की समीक्षा की गई, जिसमें RBI, बैंक ऑफ बड़ौदा और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। बैठक में रियल-टाइम रिस्पॉन्स सिस्टम को और मजबूत करने, mule accounts की पहचान बढ़ाने और बैंक व पुलिस के बीच समन्वय सुधारने पर चर्चा हुई।
अधिकारियों ने Money Redressal Module (MRM) और Grievance Redressal Module (GRM) को और प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया, ताकि फ्रीज की गई राशि को समय पर पीड़ितों तक वापस पहुंचाया जा सके।
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समीक्षा के दौरान एक हालिया मामला भी सामने रखा गया, जिसमें बदायूं के सिविल लाइंस निवासी नसीम बेगम से ₹9 लाख की ठगी हुई थी। ठगों ने उन्हें फिक्स्ड डिपॉजिट में अधिक रिटर्न का झांसा दिया था। शिकायत मिलते ही CFMC ने तुरंत कार्रवाई की और पूरी रकम ट्रांजैक्शन से पहले ही फ्रीज कर दी गई।
साइबर अपराध अधिकारियों ने कहा कि किसी भी फ्रॉड में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान अपराधी पैसे को तेजी से कई खातों में घुमा देते हैं। इसलिए तेज प्रतिक्रिया ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है।
अधिकारियों के अनुसार, पहले जून 2025 में राज्य की रिकवरी दर केवल 20.03% थी और उस समय ₹22.64 करोड़ फ्रीज किए गए थे। लेकिन CFMC के मजबूत होने के बाद रिकवरी दर और फंड फ्रीज करने की क्षमता में लगातार सुधार देखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल पेमेंट, मोबाइल बैंकिंग और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म के बढ़ने से साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में CFMC जैसे सिस्टम लोगों को वित्तीय नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हालांकि उत्तर प्रदेश में साइबर फ्रॉड शिकायतों की संख्या सबसे अधिक है, लेकिन बढ़ती रिकवरी दर यह दिखाती है कि समय पर और समन्वित कार्रवाई से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जिससे देशभर में साइबर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
