गुजरात में 500 फर्जी कंपनियों के जरिए ₹200 करोड़ साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश

₹200 करोड़ का डिजिटल घोटाला उजागर: गुजरात में फर्जी कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का संगठित नेटवर्क बेनकाब

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By Roopa
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अहमदाबाद: गुजरात में एक बड़े साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें पिछले दो वर्षों के दौरान करीब ₹200 करोड़ के अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने फर्जी कंपनियों का जाल बिछाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए और साइबर ठगी से हासिल रकम को देश-विदेश में ट्रांसफर किया।

यह नेटवर्क अत्यंत संगठित और बहु-स्तरीय तरीके से संचालित किया जा रहा था, जिसमें गुजरात के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी कनेक्शन जुड़े होने के संकेत मिले हैं। ठगी से जुटाई गई रकम को कई खातों के जरिए घुमाकर अंततः विदेश भेजा जाता था, जिससे इसकी ट्रैकिंग बेहद जटिल हो जाती थी। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन होने की भी आशंका जताई गई है।

500 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के खाते रडार पर

जांच के दौरान पिछले दो वर्षों में 500 से अधिक फर्जी कंपनियों से जुड़े बैंक खाते चिन्हित किए गए हैं। इन खातों का इस्तेमाल बड़ी रकम को छोटे हिस्सों में बांटकर ट्रांसफर करने और बाद में उसे विदेश भेजने के लिए किया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल माध्यमों का योजनाबद्ध तरीके से दुरुपयोग किया गया।

सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में रकम को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर दिया जाता था, जिससे मनी ट्रेल को छिपाना और अधिक आसान हो जाता था। इस तरह की तकनीकों का इस्तेमाल अब संगठित साइबर गिरोहों में तेजी से बढ़ रहा है।

फर्जी दस्तावेजों के सहारे कंपनियां, फिर फंड रूटिंग

जांच में यह भी सामने आया है कि साइबर गिरोह शेल कंपनियां खड़ी करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेते थे। कंपनी रजिस्ट्रेशन के दौरान:

  • नकली बैंक स्टेटमेंट प्रस्तुत किए जाते थे
  • फर्जी शेयरहोल्डिंग दिखाकर वैधता का आभास कराया जाता था

इसके बाद साइबर ठगी से जुटाई गई रकम को इन खातों में जमा किया जाता और कई स्तरों पर घुमाकर विदेश भेज दिया जाता था। यह पूरी व्यवस्था इस तरह तैयार की गई थी कि असली स्रोत तक पहुंचना बेहद कठिन हो जाए। कई कंपनियां ऐसे लोगों के नाम पर रजिस्टर की गईं, जिन्हें इस गतिविधि की जानकारी तक नहीं थी।

राज्यभर में फैला संगठित नेटवर्क

जांच के दायरे में आते ही इस तरह के नेटवर्क पर सख्ती बढ़ा दी गई है। विभिन्न स्थानों पर संदिग्ध शेल कंपनियों की पहचान की गई है, जिनके लेन-देन में असामान्य पैटर्न सामने आए हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क किसी एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर फैला हुआ है और संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा है।

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म्यूल अकाउंट्स और ‘टेस्ट ट्रांजैक्शन’ का पैटर्न

जांच में यह भी सामने आया है कि अपराधी म्यूल बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे थे। ये खाते अक्सर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के नाम पर खोले जाते थे, जिन्हें इस नेटवर्क की वास्तविक गतिविधियों की जानकारी नहीं होती थी।

साइबर गिरोह पहले ₹2 लाख से ₹5 लाख तक के छोटे ट्रांजैक्शन कर सिस्टम की जांच करते थे। इसके बाद बड़े अमाउंट ट्रांसफर किए जाते थे। कई मामलों में ऐसे खाते ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए किराए पर लिए जाते थे, जिससे पहचान छिपी रह सके।

मास्टरमाइंड तक पहुंच अब भी कठिन

हालांकि कई स्तरों पर कार्रवाई की गई है, लेकिन इस नेटवर्क के असली संचालकों तक पहुंचना अब भी चुनौती बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय लेन-देन, क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग और मल्टी-लेयर ट्रांजैक्शन सिस्टम जैसी जटिलताओं के कारण जांच की दिशा लगातार जटिल होती जा रही है।

विशेषज्ञ की चेतावनी

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा, “साइबर अपराधी अब बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। म्यूल अकाउंट्स और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए वे लेन-देन को इस तरह छिपाते हैं कि असली नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। सोशल इंजीनियरिंग के जरिए आम लोगों को भी इस नेटवर्क का हिस्सा बना लिया जाता है।”

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने बैंक खातों की जानकारी साझा करने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत सतर्क हो जाएं।

निष्कर्ष

गुजरात में सामने आया यह मामला साफ तौर पर संकेत देता है कि साइबर फ्रॉड अब एक संगठित आर्थिक अपराध का रूप ले चुका है। फर्जी कंपनियों, म्यूल खातों और डिजिटल करेंसी के जरिए संचालित इस नेटवर्क को रोकने के लिए सख्त निगरानी और तकनीकी उपायों को और मजबूत करने की जरूरत है।

जांच का फोकस अब पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और इसके पीछे के प्रमुख चेहरों तक पहुंचने पर है, ताकि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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