तीन महीने में ₹28 करोड़ की साइबर ठगी: विशाखापत्तनम में बढ़ते डिजिटल अपराध ने बढ़ाई चिंता

Roopa
By Roopa
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विशाखापत्तनम: साल 2026 की पहली तिमाही में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम शहर से साइबर अपराध का एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। जनवरी से मार्च के बीच शहर के लोगों से करीब ₹28 करोड़ की ठगी की गई है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा निवेश से जुड़े फर्जीवाड़ों और तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों का रहा। तेजी से बढ़ते इन मामलों ने साइबर सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है।

आंकड़ों के अनुसार, इन तीन महीनों के दौरान साइबर अपराध से जुड़ी 400 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनके आधार पर करीब 60 प्राथमिकी दर्ज की गईं। अधिकारियों का कहना है कि एक प्राथमिकी में कई समान प्रकार की शिकायतों को जोड़ा जाता है, जिससे शिकायतों और दर्ज मामलों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।

महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी में सबसे ज्यादा ₹12 करोड़ की ठगी हुई, जबकि फरवरी और मार्च में क्रमशः ₹8-8 करोड़ से अधिक की राशि साइबर ठगों के हाथ लग गई। यह ट्रेंड दर्शाता है कि साइबर अपराधियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं और वे नए-नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं।

जांच में सामने आया है कि कुल ठगी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा निवेश से जुड़े फर्जीवाड़ों से जुड़ा है। इसमें फर्जी शेयर बाजार ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, क्रिप्टोकरेंसी स्कैम और हाई-रिटर्न का झांसा देने वाली योजनाएं शामिल हैं। अपराधी लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं। खास बात यह है कि इस तरह की ठगी का शिकार केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा और कारोबारी वर्ग भी हो रहे हैं।

इसके अलावा, ‘डिजिटल अरेस्ट’ ठगी का हिस्सा करीब 20 प्रतिशत रहा है। इस तरह के मामलों में साइबर ठग खुद को किसी जांच एजेंसी या सरकारी अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को डराते हैं। उन्हें किसी फर्जी केस में गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता है।

अधिकारियों के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक इस तरह के अपराधों के सबसे आसान शिकार बन रहे हैं। इसके पीछे उनकी भरोसेमंद प्रवृत्ति, डिजिटल जागरूकता की कमी, अकेलापन और आर्थिक स्थिरता जैसे कई कारण हैं। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि परिवार के सदस्य दूर रहते हैं, जिससे तुरंत सलाह या सहायता नहीं मिल पाती और ठग इसका फायदा उठा लेते हैं।

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साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों पर बात करते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि अब ये केवल तकनीकी हैकिंग तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि लोगों की भावनाओं को निशाना बनाकर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। इस संदर्भ में प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “आज के समय में साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे ‘लालच’ और ‘डर’ जैसी भावनाओं का फायदा उठाकर लोगों से खुद ही पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद लोग इन जालों में फंस जाते हैं। “जब तक व्यक्ति खुद सतर्क नहीं होगा, तब तक इस तरह के अपराधों को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल है,” उन्होंने कहा।

हालांकि, राहत की बात यह है कि कई मामलों में त्वरित कार्रवाई से नुकसान को कम किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पीड़ित एक घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कर देता है, तो ट्रांजैक्शन को तुरंत फ्रीज किया जा सकता है और पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, लिंक या निवेश प्रस्ताव पर तुरंत भरोसा न करें। खासकर ऐसे ऑफर जो कम समय में अधिक मुनाफे का वादा करते हैं, उनसे सावधान रहना जरूरी है।

इसके साथ ही, मोबाइल और बैंकिंग सुरक्षा उपायों को अपनाना, जैसे मजबूत पासवर्ड रखना, दो-स्तरीय सत्यापन (टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन) सक्रिय करना और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना, बेहद जरूरी बताया गया है।

यह मामला एक बार फिर यह संकेत देता है कि डिजिटल युग में सुविधा के साथ जोखिम भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और समय पर कार्रवाई ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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