लखनऊ: Lucknow समेत पूरे उत्तर प्रदेश में सक्रिय एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एजेंसियों ने दुबई में बैठे आकिब के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। जांच में आकिब को इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक बताया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर देश के भीतर सक्रिय सदस्यों को विदेशी हैंडलर्स से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले ही इस पूरे मॉड्यूल का खुलासा हुआ था, जिसमें कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान सामने आया कि आकिब ने मुख्य आरोपी साकिब उर्फ डेविल को विदेशी संपर्कों से जोड़ने का काम किया था। इसके बाद साकिब ने अपने स्तर पर नेटवर्क को विस्तार देना शुरू कर दिया।
जांच में यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क का विस्तार केवल एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि यह Uttar Pradesh के कई जिलों के साथ-साथ Delhi, Haryana और Mumbai जैसे बड़े शहरों तक फैलाने की कोशिश की जा रही थी। एजेंसियों को शक है कि इसका उद्देश्य कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़कर बड़ी घटनाओं को अंजाम देना था।
जांच के दौरान बरामद मोबाइल फोन और डिजिटल उपकरणों से चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपियों ने Telegram पर एक दर्जन से अधिक ग्रुप बनाए थे, जिनमें सैकड़ों लोगों को जोड़ा गया था। इन ग्रुप्स के जरिए कथित तौर पर भड़काऊ सामग्री, वीडियो और पोस्ट साझा किए जाते थे, जिनका उद्देश्य युवाओं को प्रभावित कर उन्हें नेटवर्क का हिस्सा बनाना था।
सूत्रों का कहना है कि ग्रुप्स में शामिल किए गए लोगों को धीरे-धीरे विचारधारा से प्रभावित किया जाता था और फिर उन्हें आगे जोड़ने की जिम्मेदारी दी जाती थी। इस तरह एक चेन सिस्टम के जरिए नेटवर्क को तेजी से बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही थी।
इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “आज के दौर में इस तरह के नेटवर्क केवल भौतिक रूप से नहीं, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए तेजी से फैलते हैं। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर युवाओं को जोड़ना और उन्हें प्रभावित करना एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है।”
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उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के मामलों में तकनीक के साथ-साथ मानसिक रणनीति का भी इस्तेमाल किया जाता है। “लोगों को पहले भरोसे में लिया जाता है, फिर धीरे-धीरे उन्हें ऐसे कंटेंट के संपर्क में लाया जाता है जो उनके सोच को प्रभावित करता है। यही वजह है कि ऐसे नेटवर्क कम समय में बड़े स्तर पर फैल जाते हैं,” उन्होंने बताया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आकिब फिलहाल दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था और भारत में मौजूद सदस्यों को निर्देश दे रहा था। लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद अब उसके देश में प्रवेश करते ही गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों में गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाई जा रही थी। हालांकि, समय रहते कार्रवाई होने से बड़ी साजिश को नाकाम करने में सफलता मिली है।
फिलहाल, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनसे मिली जानकारी के आधार पर अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है। जांच एजेंसियां उन लोगों की भी पड़ताल कर रही हैं जो इन टेलीग्राम ग्रुप्स से जुड़े थे या किसी भी तरह इस नेटवर्क के संपर्क में आए थे।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का गलत इस्तेमाल किस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खतरों से निपटने के लिए तकनीकी निगरानी के साथ-साथ आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी बेहद जरूरी है।
आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और नेटवर्क के हर स्तर तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
