फर्जी बिलिंग और अत्यधिक परीक्षणों के आरोप; व्हिसलब्लोअर्स को ₹33.8 करोड़ का हिस्सा मिलेगा

अटलांटा के डॉक्टर पर मेडिकल फ्रॉड का आरोप: ₹161 करोड़ का निपटारा, रोगियों से किए गए अनावश्यक और न किए गए उपचारों का भुगतान

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली / अटलांटा: अमेरिका में भारतीय मूल के डॉक्टर, डॉ. जितेश पटेल और उनके अटलांटा स्थित क्लिनिक एडवांस्ड यूरोलॉजी ने लगभग ₹161 करोड़ का समझौता किया है, जो उनके खिलाफ लगाए गए हेल्थकेयर फ्रॉड के आरोपों का समाधान है। आरोपों के अनुसार, क्लिनिक ने अनावश्यक या न किए गए मेडिकल प्रक्रियाओं के लिए मेडिकेयर, मेडिकेड, ट्राइकेयर और अन्य संघीय कार्यक्रमों को फर्जी बिलिंग की।

अमेरिका के न्याय विभाग (DoJ) ने 2 अप्रैल को जारी बयान में बताया कि यह निपटारा False Claims Act और Georgia False Medicaid Claims Act के तहत दर्ज मामलों को समाप्त करता है। जांच, जिसमें एफबीआई सहित कई एजेंसियां शामिल थीं, दो व्हिसलब्लोअर्स द्वारा दायर मुकदमों के बाद शुरू हुई थी।

व्हिसलब्लोअर्स ने किया सिस्टमेटिक मैलप्रैक्टिस का खुलासा

फ्रीक्लिन की पूर्व कर्मचारी लोर्रेन पेरुमल-ज़रैमल और पूर्व चिकित्सक डॉ. हिमांशु अग्रवाल ने मुकदमे में आरोप लगाया कि क्लिनिक ने लाभ को मरीजों की भलाई से ऊपर रखा। उनका दावा था कि नए मरीजों को अक्सर बिना स्पष्ट चिकित्सीय कारणों के अत्यधिक और इनवेसिव टेस्ट करवाए जाते थे।

आरोपों में शामिल थे:

  • सैक्रल नर्व स्टिम्युलेटर का इम्प्लांटेशन बिना सही मूल्यांकन के।
  • सामान्य यूरोलॉजी उपचार में असामान्य रूप से सिस्टोस्कोपी और रेट्रोग्रेड पायलोग्राम जैसे टेस्ट।
  • इलेक्ट्रोड के माध्यम से जेनिटल क्षेत्र पर किए जाने वाले रूटीन इलेक्ट्रोमायोग्राफी टेस्ट।
  • अत्यधिक और अनावश्यक अल्ट्रासाउंड आदेश।

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बिलिंग अनियमितताएं और समझौते का विवरण

मुकदमे में यह भी कहा गया कि क्लिनिक ने सरल प्रक्रियाओं को करने के बावजूद जटिल प्रक्रियाओं, जैसे Direct Visual Internal Urethrotomy, के लिए बिलिंग की, जिसे “अपकोडिंग” कहा जाता है। FOX 5 अटलांटा की रिपोर्ट ने भी इन आरोपों की पुष्टि की कि कभी-कभी सर्जरी बिना किए बिल की जाती थी।

अधिकारीयों ने बताया कि यह स्पष्ट नहीं है कि मरीजों को दीर्घकालिक नुकसान हुआ या नहीं, लेकिन उल्लंघन की गंभीरता को रेखांकित किया गया। अमेरिकी अटॉर्नी थियोडोर एच. हर्ट्ज़बर्ग ने कहा, “अनावश्यक या न किए गए सेवाओं के लिए बिलिंग करना फ्रॉड है।” जॉर्जिया के उप अटॉर्नी जनरल जिम मूनी ने इसे करदाताओं की रकम की चोरी करार दिया। एफबीआई अधिकारियों ने कहा कि यह योजना लाभ को मरीजों की भलाई से ऊपर रखती थी।

समझौते के तहत, व्हिसलब्लोअर्स को ₹33.8 करोड़ मिलेगा।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मरीजों को केवल मान्यता प्राप्त और आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर ही उपचार और निवेश संबंधी निर्णय करने चाहिए। “सिस्टमेटिक फ्रॉड अक्सर तब होता है जब प्रोसेस में पारदर्शिता न हो। मरीजों को डॉक्टर और क्लिनिक के रिकॉर्ड को सावधानीपूर्वक जांचना चाहिए,” साइबर और हेल्थकेयर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा।

यह मामला यह दर्शाता है कि कैसे तकनीकी रूप से सक्षम फ्रॉडस्टर्स मरीजों को झांसा देकर अनावश्यक और न किए गए इलाज के लिए भुगतान करवा सकते हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली में ऐसे बड़े फ्रॉड से निपटने के लिए स्पष्ट SOP और जांच तंत्र का होना अत्यंत आवश्यक है।

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