ज्येष्ठ महिला समेत तीन लोग बने शिकार; मोबाइल हैक कर बैंक खाते साफ, शहर में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पर अलर्ट

₹5 के लालच में ₹5.54 लाख की ठगी: पुणे में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट, टास्क और कार्ड अपडेट के नाम पर तीन बड़े साइबर हमले

Roopa
By Roopa
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पुणे: Pune में साइबर ठगों के बढ़ते हौसले का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां महज ₹5 की ऑनलाइन पेमेंट के बहाने एक ज्येष्ठ महिला से ₹5.54 लाख की ठगी कर ली गई। पिछले 24 घंटों में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में कुल मिलाकर करीब ₹8 लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी हुई है, जिससे शहर में ऑनलाइन फ्रॉड को लेकर चिंता बढ़ गई है।

पहले मामले में, एक ज्येष्ठ महिला, जो साइनस की समस्या से परेशान थीं, इंटरनेट पर डॉक्टर की जानकारी खोज रही थीं। इसी दौरान उन्हें एक मोबाइल नंबर मिला, जिसे उन्होंने अपॉइंटमेंट लेने के लिए संपर्क किया। लेकिन यह नंबर असली डॉक्टर का नहीं, बल्कि साइबर ठगों द्वारा डाला गया था।

₹5 की पेमेंट से खुला ठगी का रास्ता

ठगों ने महिला को भरोसा दिलाते हुए कहा कि अपॉइंटमेंट कन्फर्म करने के लिए केवल ₹5 ऑनलाइन जमा करने होंगे। महिला ने जैसे ही यह रकम ट्रांसफर की, ठगों ने तकनीकी तरीके से उनके मोबाइल नंबर पर नियंत्रण हासिल कर लिया।

इसके बाद उनके बैंक खाते से ₹5.54 लाख अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिए गए। परिवार को जब संदेह हुआ और मोबाइल नंबर अचानक बंद मिला, तब जाकर ठगी का खुलासा हुआ। पीड़िता ने मामले की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई है।

ऑनलाइन टास्क के नाम पर युवक से लाखों की ठगी

दूसरे मामले में, शहर के सिंहगढ़ रोड इलाके में रहने वाले एक युवक को “घर बैठे कमाई” का लालच देकर जाल में फंसाया गया। ठगों ने पहले उसे छोटे-छोटे ऑनलाइन टास्क दिए और भुगतान का झांसा देकर विश्वास जीत लिया।

इसके बाद युवक को बड़े रिटर्न का लालच देकर निवेश करने के लिए कहा गया। अलग-अलग किश्तों में उसने ₹2.71 लाख ट्रांसफर कर दिए। लेकिन जब पैसे वापस निकालने की कोशिश की गई, तो संपर्क टूट गया और ठगी का एहसास हुआ।

क्रेडिट कार्ड अपडेट के नाम पर युवती को निशाना

तीसरे मामले में, खड़की क्षेत्र की एक युवती को फोन कर ठगों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताया। उन्होंने कहा कि यदि क्रेडिट कार्ड की जानकारी अपडेट नहीं की गई, तो कार्ड बंद कर दिया जाएगा।

डर के माहौल में युवती ने अपनी बैंकिंग डिटेल्स साझा कर दीं। इसके बाद ठगों ने खाते से ₹2.99 लाख निकाल लिए। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू की गई है।

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तीनों मामलों में एक जैसी चाल

इन तीनों घटनाओं में साइबर ठगों की कार्यप्रणाली लगभग समान पाई गई—पहले भरोसा जीतना, फिर छोटी रकम या जानकारी के जरिए सिस्टम तक पहुंच बनाना और अंततः बड़े पैमाने पर पैसे निकाल लेना।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह “सोशल इंजीनियरिंग” का क्लासिक उदाहरण है, जहां ठग तकनीकी हैकिंग से ज्यादा लोगों की मानसिक स्थिति और भरोसे का फायदा उठाते हैं।

डिजिटल लापरवाही बन रही बड़ी वजह

इन मामलों ने यह साफ कर दिया है कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी आर्थिक हानि में बदल सकती है। चाहे वह ₹5 की पेमेंट हो, फर्जी जॉब ऑफर हो या बैंकिंग जानकारी साझा करना—हर कदम पर सतर्कता जरूरी है।

साइबर सुरक्षा पर चेतावनी

प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “आजकल साइबर ठग सीधे सिस्टम को हैक करने के बजाय लोगों की भावनाओं और जरूरतों का फायदा उठाते हैं। अपॉइंटमेंट, जॉब या बैंक अपडेट जैसे बहाने सिर्फ एक एंट्री पॉइंट होते हैं।”

उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक, कॉल या पेमेंट रिक्वेस्ट पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

शहर में लगातार बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए नागरिकों को जागरूक रहने की जरूरत है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर से दूरी बनाए रखना और तुरंत शिकायत दर्ज कराना ही ऐसे अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

पुणे में सामने आए ये तीन मामले इस बात का संकेत हैं कि साइबर अपराध अब तेजी से बदलते स्वरूप में आम लोगों को निशाना बना रहे हैं, और इनके खिलाफ जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार बन सकती है।

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