बेंगलुरु: बेंगलुरु के कॉक्स टाउन में रहने वाले 80 वर्षीय वैद्यनाथन एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार बने हैं, जिसमें उन्हें फर्जी बैंक अधिकारियों के बहाने से ₹2.51 करोड़ से अधिक की ठगी का सामना करना पड़ा। पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता वैद्यनाथन ने 4 अप्रैल को ईस्ट डिवीजन साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में उन्होंने फेसबुक पर एक विज्ञापन देखा, जिसमें स्टॉक टिप्स और IPO ब्लॉक ट्रेडिंग की पेशकश की जा रही थी। विज्ञापन में झूठा दावा किया गया था कि यह एक निजी बैंक और उसके सिक्योरिटीज विंग से जुड़ा है।
इस लिंक पर व्यक्तिगत विवरण जमा करने के बाद उन्हें ‘अन्विका मेहरा’ नाम की एक महिला और अन्य कई लोग विभिन्न फोन नंबरों के माध्यम से संपर्क कर निवेश के लिए उकसाने लगे। आरोपी उन्हें दो मोबाइल एप्लिकेशन KOTMOT और KOTPRO पर निवेश करने के लिए राजी कर चुके थे, जो Google Play Store पर उपलब्ध थे। एप्स में दिखाया गया कि उनका निवेश ₹2.51 करोड़ से बढ़कर लगभग ₹5 करोड़ हो गया है।
इसके बाद आरोपियों ने उन्हें अतिरिक्त ₹3 करोड़ जमा करने का दबाव डाला, ताकि कथित IPO अलॉटमेंट सुरक्षित किया जा सके। यह अलॉटमेंट बाद में पूरी तरह फर्जी निकला। वैद्यनाथन ने कथित बैंक के सिक्योरिटीज सपोर्ट के नाम पर बने WhatsApp ग्रुप में दिए गए कस्टमर सपोर्ट नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली।
पुलिस ने बताया कि वैद्यनाथन ने 23 अलग-अलग लेनदेन किए, जिनमें कुल राशि ₹2.5 करोड़ से अधिक थी, और यह पूरा धन आरोपियों के नियंत्रित कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया।
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साइबर क्राइम पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66C और 66D तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 318(4) के तहत कार्रवाई की। जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों की पहचान और वैद्यनाथन से ठगे गए पैसे की रिकवरी के लिए सक्रिय छानबीन जारी है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “यह रैकेट सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल पहचान की कमजोरियों का फायदा उठाकर वृद्ध व्यक्तियों को निशाना बनाता है। ऐसे मामलों में वित्तीय और साइबर सुरक्षा के कड़े उपाय आवश्यक हैं।”
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने वैद्यनाथन को नकली निवेश रिटर्न दिखाकर धोखा दिया और उन्हें अतिरिक्त राशि लगाने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव डाला। पुलिस अधिकारियों ने चेताया कि इस तरह के डिजिटल फ्रॉड में अक्सर बहु-खाते (multiple bank accounts) और नकली एप्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ट्रेस करना कठिन हो जाता है।
अधिकारियों ने कहा कि शिकायतकर्ता की सूचना पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर डिजिटल लेनदेन और बैंक खातों का विश्लेषण शुरू कर दिया गया है, ताकि संपूर्ण फंड फ्लो और संभावित सहयोगियों की पहचान की जा सके।
यह मामला न केवल बेंगलुरु में बड़े पैमाने पर साइबर फ्रॉड की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह डिजिटल निवेश में सुरक्षा जागरूकता और बैंकिंग सत्यापन प्रक्रिया की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। अधिकारियों ने जनता से सावधान रहने और ऑनलाइन निवेश करते समय सत्यापित प्लेटफॉर्म और आधिकारिक चैनलों का उपयोग करने की अपील की है।
जांच जारी है और पुलिस का लक्ष्य आरोपियों को पकड़कर वैद्यनाथन से ठगे गए पैसों की वसूली करना है।
