जयपुर: जयपुर पुलिस ने सोमवार को पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर सरकारी पोर्टल्स में अवैध रूप से प्रवेश कर एक्सपोर्ट इंसेंटिव सिक्रिप्ट्स को हेराफेरी करने का आरोप है। प्रारंभिक जांच में अनुमान लगाया गया है कि इस रैकेट के कारण राजस्व को लगभग ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ हो सकता है।
पुलिस कमिश्नर ने आरोपीयों की पहचान सुलतान खान, नंद किशोर, निर्मल सोनी, अशोक कुमार भंडारी और प्रमोद खत्री, सभी जोधपुर निवासी के रूप में की है। विशेष आयुक्त ने बताया कि यह गिरोह फर्जी पहचान पत्रों का उपयोग कर डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) बनाता था और उन्हें डीजीएफटी-ICEGATE पोर्टल में गैरकानूनी प्रवेश के लिए इस्तेमाल करता था।
“उन्होंने फर्जी आधार और पैन कार्ड डिटेल्स का उपयोग कर DSC प्राप्त किया। इन डिजिटल सिग्नेचर्स के माध्यम से उन्होंने आधिकारिक एक्सपोर्टर्स के अकाउंट्स में प्रवेश किया और उनके इंसेंटिव सिक्रिप्ट्स को नियंत्रित फर्जी आयातक-निर्यातक कोड (IEC) अकाउंट्स में ट्रांसफर किया,” विशेष आयुक्त ने कहा।
पुलिस ने बताया कि आरोपी RODTEP और ROSCTL जैसी एक्सपोर्ट इंसेंटिव योजनाओं के तहत जारी किए गए ड्यूटी क्रेडिट सिक्रिप्ट्स को फर्जी खातों में स्थानांतरित कर उनका नकद लेन-देन या बिक्री करते थे। इसके अलावा, यह गिरोह अपनी धनराशि के अवैध लेन-देन के रास्ते को छिपाने के लिए कई ‘म्यूल अकाउंट्स’ का इस्तेमाल करता था। म्यूल अकाउंट्स ऐसे वैध बैंक खाते होते हैं जिनके माध्यम से अपराधी अवैध धन प्राप्त, ट्रांसफर या लॉन्डरिंग करते हैं।
जांच अधिकारियों ने बताया कि यह रैकेट देशभर में फैला हुआ था और इसके संचालन में फर्जी पहचान, डिजिटल हेराफेरी और बैंकिंग सिस्टम का कुशल दुरुपयोग शामिल था। आरोपीयों ने न केवल एक्सपोर्टर्स के वित्तीय लाभ को हड़पने का प्रयास किया, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता और वित्तीय पारदर्शिता को भी चुनौती दी।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “ऐसे रैकेट अक्सर सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल पहचान की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। यदि ऑनलाइन पोर्टल्स पर सुरक्षा सख्त न हो तो बड़े पैमाने पर सरकारी योजनाओं और लाभार्थियों को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।”
पुलिस ने आगे बताया कि गिरफ्तार आरोपी पिछले छह महीने से सक्रिय थे और उनके खिलाफ कई पंजीकृत शिकायतें और प्रारंभिक जांच रिपोर्टें मौजूद हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके संपर्क में आए अन्य फर्जी खाताधारकों और संभावित वित्तीय भागीदारों की तलाश शुरू कर दी गई है।
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विशेष आयुक्त ने कहा, “हमारा लक्ष्य इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क के सभी कनेक्शन और धनराशि के मार्ग को उजागर करना है। सरकार की एक्सपोर्ट इंसेंटिव योजनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। इस मामले में किसी भी तरह की सहूलियत नहीं दी जाएगी।”
पुलिस के अनुसार, डीजीएफटी-ICEGATE पोर्टल पर सुरक्षा कमजोरियों का फायदा उठाकर आरोपीयों ने कई वास्तविक एक्सपोर्टर्स के डेटा को अपने नियंत्रण में लिया और उनके लाभ को अपने फर्जी खाते में ट्रांसफर किया। अधिकारियों ने चेताया कि इस तरह के अपराध साइबर सुरक्षा जागरूकता और डिजिटल सत्यापन प्रक्रियाओं को मजबूत करने की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
जांच अब तक यह संकेत देती है कि रैकेट का नेटवर्क जौधपुर से जयपुर और अन्य हिस्सों तक फैला हुआ था, और इसके माध्यम से बड़े पैमाने पर सरकारी इंसेंटिव सिक्रिप्ट्स की अवैध बिक्री और नकदीकरण किया गया।
पुलिस ने कहा कि गिरफ्तारी और प्रारंभिक पूछताछ के बाद आरोपियों के बैंक खाते और डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि सम्पूर्ण फंड फ्लो और संबंधित अपराधियों की पहचान की जा सके।
यह मामला देश में साइबर अपराध और सरकारी पोर्टल्स के दुरुपयोग की गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, और आगे की जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने अन्य एक्सपोर्टर्स और सरकारी योजनाओं को प्रभावित किया गया।
