नई दिल्ली: राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार को सात विदेशी नागरिकों को 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इनमें एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक—हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफांकीव मारियन, होनचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर—शामिल हैं। सभी आरोपियों को एनआईए की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में पेश किया गया।
इससे पहले अदालत ने 16 मार्च को पूछताछ के लिए 11 दिन की हिरासत दी थी, जिसे बाद में 10 दिन और बढ़ाया गया। सोमवार को सुनवाई के दौरान एनआईए ने अदालत से सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया।
जांच एजेंसी के अनुसार, यूक्रेन के ये नागरिक अलग-अलग तारीखों पर भारत आए थे, सभी के पास टूरिस्ट वीजा था। गुवाहाटी पहुंचने के बाद, उन्होंने आवश्यक अनुमति लिए बिना मिजोरम की सीमा पार की। इसके बाद ये आरोपी अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश कर गए।
एनआईए के सूत्रों ने बताया कि इस मामले की गहन जांच चल रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि आरोपियों की गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं। इसके तहत सीमा पार करने और अनधिकृत क्षेत्रों में प्रवेश करने के मामले पर विशेष ध्यान दिया गया। एजेंसी का मानना है कि ऐसे विदेशी नागरिकों की गतिविधियों पर नियंत्रण न रखने पर संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती हो सकती है।
कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को 30 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजते हुए एनआईए को जांच जारी रखने का अधिकार दिया। अदालत ने कहा कि हिरासत अवधि के दौरान एजेंसी को सभी कानूनी साधनों का प्रयोग कर आरोपियों की गतिविधियों और उनके नेटवर्क की जानकारी इकट्ठा करने की अनुमति होगी।
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इस मामले में एनआईए ने अदालत को बताया कि आरोपियों ने गुवाहाटी से मिजोरम तक यात्रा के दौरान किसी भी स्थानीय प्रशासन से अनुमति नहीं ली थी। इसके बाद अवैध रूप से म्यांमार में प्रवेश करने से यह स्पष्ट होता है कि उनकी गतिविधियां नियोजित और संगठित थीं। एजेंसी ने अदालत से सुरक्षा के लिहाज से उनके लंबी अवधि की हिरासत की मांग की।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला उस बढ़ते खतरे को उजागर करता है, जिसमें विदेशी नागरिक भारत के संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध रूप से प्रवेश कर सकते हैं। ऐसे मामलों में न्यायिक हिरासत और विस्तृत जांच के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।
एनआईए ने अदालत से यह भी कहा कि हिरासत अवधि में आरोपियों की यात्रा, उनके संपर्क नेटवर्क और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी हासिल करना आवश्यक है। इससे भविष्य में किसी भी सुरक्षा खतरे को समय रहते रोकने में मदद मिलेगी।
अदालत ने इस मामले में सुरक्षा और जांच की गंभीरता को देखते हुए सभी सात विदेशी नागरिकों को 30 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अब एनआईए इस दौरान आरोपियों की हर गतिविधि का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करेगी और अदालत में रिपोर्ट करेगी।
यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जा रहा है और एजेंसी ने इसे प्राथमिकता पर रखते हुए जांच तेज कर दी है।
