अहमदाबाद: Ahmedabad में ऑनलाइन निवेश ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक 40 वर्षीय पेशेवर व्यक्ति को ₹56.35 लाख का चूना लगाया गया। आरोप है कि डेटिंग प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में आई एक महिला ने उसे ऊंचे मुनाफे का लालच देकर फर्जी करेंसी ट्रेडिंग स्कीम में फंसा लिया। यह मामला इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधी अब भावनात्मक भरोसे और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर ठगी कर रहे हैं।
शिकायत के अनुसार, मणिनगर क्षेत्र में रहने वाला पीड़ित, जो एक फार्मास्युटिकल कंपनी में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत है, की मुलाकात Tinder पर आराही गुप्ता नाम की महिला से हुई थी। शुरुआत में सामान्य बातचीत के बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और धीरे-धीरे बातचीत वित्तीय विषयों तक पहुंच गई।
जांच में सामने आया कि महिला ने पहले पीड़ित का भरोसा जीता और फिर उसे करेंसी ट्रेडिंग में निवेश का प्रस्ताव दिया। उसने दावा किया कि यह योजना बेहद लाभकारी है और इसमें कम समय में बड़ा मुनाफा मिल सकता है। उसके विश्वास में आकर पीड़ित ने इस निवेश को आजमाने का फैसला किया।
इसके बाद पीड़ित को एक अज्ञात मोबाइल ऐप डाउनलोड करने और उसमें अपना खाता बनाने के लिए कहा गया। उसने अपने व्यक्तिगत दस्तावेज जमा कर खाते का निर्माण किया। शुरुआत में उसने ₹40,000 का निवेश किया। कुछ ही समय में ऐप पर उसका बैलेंस ₹43,000 से अधिक दिखाया गया, जिससे उसे योजना पर भरोसा हो गया।
इस शुरुआती “मुनाफे” से प्रभावित होकर पीड़ित ने धीरे-धीरे अधिक धन निवेश करना शुरू कर दिया। कुल मिलाकर उसने ₹35.40 लाख इस ऐप में जमा कर दिए। ऐप लगातार बढ़ते हुए मुनाफे का आंकड़ा दिखाता रहा और एक समय पर बैलेंस ₹1.24 करोड़ तक दिखाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के फर्जी आंकड़े दिखाकर ठग पीड़ितों को और अधिक निवेश के लिए उकसाते हैं।
मामला तब गंभीर हुआ जब पीड़ित ने अपने पैसे निकालने की कोशिश की। इस दौरान उसे बताया गया कि निकासी के लिए अतिरिक्त शुल्क देना होगा। ठगों ने टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर उससे और पैसे मांगे। अपनी रकम वापस पाने की उम्मीद में पीड़ित ने ₹17 लाख और ₹3.95 लाख अलग-अलग लेनदेन में जमा कर दिए।
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इसके बावजूद उसे कोई रकम वापस नहीं मिली। जब बार-बार प्रयास करने पर भी न तो पैसे मिले और न ही आरोपी से संपर्क हो पाया, तब उसे ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जहां मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह ठगी सुनियोजित तरीके से की गई, जिसमें सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल हेरफेर का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाए जाते हैं, जो नकली मुनाफा दिखाकर पीड़ित को भ्रमित करते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डेटिंग ऐप अब ठगी के नए माध्यम बनते जा रहे हैं। अपराधी पहले फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से भावनात्मक संबंध स्थापित करते हैं, फिर उन्हें निवेश के नाम पर फंसाते हैं। एक बार जब पीड़ित पैसा लगाना शुरू कर देता है, तो उससे लगातार और रकम वसूली जाती है।
जांच एजेंसियां अब बैंक लेनदेन, आईपी एड्रेस और डिजिटल कम्युनिकेशन की जांच कर रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले के पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह सक्रिय है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अनजान लोगों से सतर्क रहें और किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी जांच करें। साथ ही, किसी भी अनजान ऐप या लिंक के जरिए वित्तीय लेनदेन करने से बचने की सलाह दी गई है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठगी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं, जहां तकनीक और मानव मनोविज्ञान का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
