दुबई से संचालित ऑनलाइन गेमिंग ठगी नेटवर्क में 74 फर्जी ब्रांच, करोड़ों की ठगी, लग्जरी ट्रिप और कैसीनो पार्टियों का खुलासा

75 मामलों में ₹67 करोड़ का साइबर ठगी गिरोह पकड़ा, 3 आरोपियों के साथ 700 नकली खाते बरामद

Roopa
By Roopa
4 Min Read

वाराणसी/गाजीपुर: साइबर अपराध के क्षेत्र में लगातार बढ़ती घटनाओं के बीच, गाजीपुर पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि गिरोह ने 25 राज्यों में कुल 75 मामलों में लोगों को निवेश, ट्रेडिंग और गेमिंग के नाम पर ठगा। आरोपियों द्वारा ₹67 करोड़ की ठगी 700 नकली खातों के माध्यम से अंजाम दी गई।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरोह ने ‘क्राउन पे’ नामक कंपनी का संचालन किया और Telegram ऐप के जरिए लोगों को आकर्षक निवेश, गेमिंग और ट्रेडिंग ऑफर देने के बहाने फंसाया। इसके अलावा, कई लोगों को नकली खाते खोलने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि इन खातों में ठगी से प्राप्त राशि भेजी जा सके और इसके बदले में आकर्षक कमीशन दिया जाए।

गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी हैं—रिशिराज, जो डिप्लोमा इंजीनियर है; रोहन कुमार, जो DRDO दिल्ली में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी के रूप में काम करता था; और सचिन सिंह, जो विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। ये तीनों चंदौली, गाजीपुर और सोनभद्र से जुड़े हुए हैं। उन्हें लंका मैदान के पास से पकड़ा गया। तलाशी के दौरान 19 सिम कार्ड, 12 एटीएम कार्ड, पांच पासबुक, एक चेक बुक, पांच मोबाइल फोन, एक फर्म का स्टाम्प और सील, GST और MSME से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।

जांच में आरोपियों ने अपना modus operandi बताया। गिरोह के सदस्य विभिन्न राज्यों में लोगों को नकली खाते खोलने के लिए प्रोत्साहित करते थे। इसके लिए वे व्यक्ति का आधार, पैन और फोटो का उपयोग करते थे। इसके बाद MSME सर्टिफिकेट बनवाकर, GST नंबर के साथ चालू खाता खुलवाया जाता था। इसके बाद बैंक खाता विवरण जैसे इंटरनेट बैंकिंग ID, पासवर्ड, रजिस्टर्ड ईमेल और मोबाइल नंबर Telegram के जरिए गिरोह तक भेजा जाता था। APK फाइल भेजकर OTP और अन्य संदेश भी अपने पास ट्रांसफर कर लेते थे।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

साइबर अपराध के लिए क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल किया जाता था। प्रत्येक आरोपी का क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर अलग ID थी। जांच में यह भी पता चला कि सचिन और रोहन ने क्रमशः ₹2.5 करोड़ और ₹1.75 करोड़ कमाए, और लगभग 24 नकली खाते अपराध में इस्तेमाल किए।

विशेषज्ञों ने इस मामले पर चिंता जताई। प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा, “साइबर गिरोह सोशल इंजीनियरिंग तकनीक और नकली खातों के माध्यम से आसानी से बड़ी रकम निकाल लेते हैं। ऐसे मामलों में केवल तकनीकी जाँच ही नहीं, बल्कि लोगों की सतर्कता भी बेहद जरूरी है।”

इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को देखते हुए, साइबर क्राइम मुख्यालय लखनऊ और गृह मंत्रालय को भी सूचित किया गया है। जिले की साइबर क्राइम सेल द्वारा अब भी शिकायतों और जांच के परिणामों का विश्लेषण जारी है।

यह मामला नागरिकों के लिए चेतावनी है कि किसी भी निवेश या ऑनलाइन कमाई के अवसर को बिना जांचे-परखे स्वीकार न करें। विशेषज्ञों ने कहा कि व्यक्तिगत जानकारी और बैंक विवरण साझा करते समय हमेशा सतर्क रहना चाहिए।

जांच अभी भी जारी है, और अधिकारियों का कहना है कि अन्य सहयोगियों और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान भी जल्द ही की जाएगी। इस गिरफ्तारी ने साबित किया कि साइबर अपराध को रोकने के लिए सतर्कता और प्रभावी जांच आवश्यक है।

हमसे जुड़ें

Share This Article