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सिद्धार्थनगर में डमी कंपनी के जरिए 60 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी का मामला, एक आरोपी गिरफ्तार

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By Roopa
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सिद्धार्थनगर/देवरिया: जिले में डमी कंपनी बनाकर खातों में करोड़ों रुपये के धोखाधड़ी लेन-देन का मामला सामने आया है। पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले में माखन लाल गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस मामले का दूसरा आरोपी अभी फरार है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह फर्जी कंपनी अब तक करीब 60 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन कर चुकी है।

जानकारी के अनुसार, नगर के रुद्रपुर टैक्सी स्टैंड के पास बरगईयां टोला जयनगर वार्ड नंबर चार निवासी माखन लाल गुप्ता लेक्सी रूफ सॉफ्टवेयर साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के नाम से फर्जी कंपनी चला रहा था। कंपनी का पंजीकरण कानून के अनुसार कराया गया था, लेकिन इसके वास्तविक कार्य संचालन का कोई प्रमाण नहीं था।

पुलिस के मुताबिक, इस कंपनी के खातों में बड़ी संख्या में रकम जमा कर अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया गया। कंपनी पर विभिन्न राज्यों से केंद्र सरकार के एनसीआरपी पोर्टल के जरिए लगभग 46 शिकायतें दर्ज की गई थीं। इसके बाद साइबर क्राइम टीम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की।

पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। उसके कब्जे से दो लैपटॉप, 11 चेकबुक, दो कैंसिल लूज चेक, एक-एक पासबुक और आधार कार्ड, नौ एटीएम कार्ड और एक एपीआई एग्रीमेंट स्टैम्प सहित कई महत्वपूर्ण कागजात बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने नौ अन्य व्यक्तियों के नाम से बनाए गए खातों का संचालन भी किया था। इन खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड भी उसके पास मिले।

माखन लाल गुप्ता बरहज में रुद्रपुर जाने वाले टैक्सी स्टैंड पर ट्रैवल एजेंसी का कार्यालय संचालित करता था। स्थानीय लोगों के अनुसार, बुधवार को पुलिस की टीम सफेद रंग की लाल बत्ती लगी बोलेरो गाड़ी में आई और माखन लाल को हिरासत में लेकर गई। इसके कुछ घंटों बाद बृहस्पतिवार को फिर से पुलिस टीम ट्रैवल एजेंसी में छापेमारी के लिए पहुंची।

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पुलिस के मुताबिक, लेक्सी रूफ सॉफ्टवेयर साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का पंजीकरण लगभग छह महीने पहले हुआ था। इस दौरान कंपनी ने कोई वास्तविक व्यावसायिक काम नहीं किया, केवल पैसे के लेन-देन की गतिविधियां नजर आईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रकम का ट्रांजेक्शन केवल धोखाधड़ी के उद्देश्य से किया गया था।

साइबर क्राइम एक्सपर्ट के अनुसार, “ऐसे मामले सामाजिक इंजीनियरिंग और फर्जी कंपनियों के जरिए बड़े पैमाने पर आर्थिक अपराध की नई प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। इससे न केवल आम लोगों का नुकसान होता है बल्कि सरकारी निगरानी और वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।”

इससे पहले भी आरपीएफ ने ट्रैवल एजेंसी पर तत्काल टिकट को लेकर छापेमारी की थी और माखन लाल को हिरासत में लिया गया था। लेकिन उस समय यह मामला आर्थिक धोखाधड़ी तक नहीं पहुंचा था। अब पुलिस की गहन जांच और डिजिटल ट्रैकिंग से यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।

स्थानीय लोगों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है और कहा कि ऐसी घटनाएं भविष्य में आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सतर्कता और निगरानी की आवश्यकता को दर्शाती हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि दूसरे आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।

इस पूरे मामले से सिद्धार्थनगर में फर्जी कंपनियों और ऑनलाइन आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को किसी भी अनजान निवेश या वित्तीय लेन-देन से पहले कंपनी की वैधता और प्रमाणिकता की जांच करनी चाहिए।

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