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आगरा में क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड पॉइंट के नाम पर करोड़ों की ठगी, 10 शातिर गिरफ्तार

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By Roopa
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आगरा: क्रेडिट कार्ड के रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में मुख्य आरोपी देव चौहान समेत 10 शातिरों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से नकदी, मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड और पहचान पत्र बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की ठगी के सबूत भी सामने आए हैं।

जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। आरोपी खुद को बैंक या क्रेडिट कार्ड कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को कॉल करते थे। इसके बाद पीड़ितों को उनके क्रेडिट कार्ड पर जमा रिवॉर्ड पॉइंट्स को तुरंत रिडीम कराने का लालच दिया जाता था। बातचीत के दौरान आरोपी भरोसा जीतकर ओटीपी हासिल कर लेते थे और कुछ ही मिनटों में खाते से रकम निकाल लेते थे।

मामले का खुलासा तब हुआ जब साइबर क्राइम पोर्टल और समन्वय एप के जरिए मिली शिकायतों की जांच शुरू की गई। बंगलुरू निवासी सरिता नामक महिला ने 1.30 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई। इसी तरह एक अन्य महिला ने भी 9 हजार रुपये की ठगी की जानकारी दी। दोनों मामलों में तरीका एक जैसा था—रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम कराने का झांसा और ओटीपी हासिल कर ट्रांजेक्शन।

इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उनके आईपी एड्रेस की तकनीकी जांच की। डिजिटल ट्रैकिंग के जरिए गिरोह के नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, 7 डेबिट कार्ड, 3 आधार कार्ड और नकदी बरामद की गई है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी सिम कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी पहचान छिपी रहती थी और ठगी का पैसा तेजी से अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।

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पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह के सदस्य अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते थे। कुछ लोग कॉल कर शिकार तलाशते थे, जबकि अन्य बैंकिंग लेन-देन और कैश निकासी का काम संभालते थे। इस तरह यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई राज्यों में लोगों को निशाना बना चुका था।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम एक्सपर्ट और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “इस तरह के साइबर अपराधों में सोशल इंजीनियरिंग सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है। अपराधी पहले पीड़ित का विश्वास जीतते हैं, फिर उसे तत्काल लाभ का लालच देकर संवेदनशील जानकारी हासिल करते हैं। रिवॉर्ड पॉइंट, केवाईसी अपडेट और बैंक अलर्ट जैसे बहाने आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।”

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कई बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स के जरिए पैसे को तेजी से घुमाया, जिससे ट्रांजेक्शन ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। हालांकि तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस ने गिरोह तक पहुंच बनाई।

इस मामले में कुल 20 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। आम लोगों को सलाह दी गई है कि किसी भी अनजान कॉल पर ओटीपी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज कराएं।

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