आसिफ अली ने नकली दस्तावेजों और फर्जी फर्म के जरिए किया सरकारी राजस्व से खेल, SIT ने दबोचा आरोपी

सोनभद्र में फर्जी फर्म से ₹70 लाख का आईटीसी गबन, आरोपी गिरफ्तार

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By Roopa
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सोनभद्र: जिले में फर्जी फर्मों के माध्यम से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाला करने के मामले में विशेष जांच टीम (SIT) ने लगभग ₹70 लाख के गबन में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह खुलासा शुक्रवार को किया गया। आरोपी आसिफ अली, निवासी डाला बाजार मेन मार्केट, थाना चोपन, कथित तौर पर अपने फर्जी व्यवसाय डीके एसोसिएट्स के जरिए सरकारी कर का भुगतान किए बिना आईटीसी का लाभ उठा रहा था।

जानकारी के अनुसार, राज्य कर विभाग ने 13 जनवरी को राबर्ट्सगंज कोतवाली में मामला दर्ज किया था। जांच में यह सामने आया कि आरोपी ने बिना वास्तविक व्यापार के केवल कागजी लेन-देन के माध्यम से आईटीसी का लाभ हासिल किया। आरोपी ने विभिन्न फर्जी फर्मों का संचालन कर अलग-अलग वित्तीय वर्षों में लगभग ₹70 लाख का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट अपने विवरणों में दर्ज किया।

SIT प्रभारी निरीक्षक राजेश प्रसाद यादव ने बताया कि आरोपी ने किसी भी लेन-देन के वैध दस्तावेज जैसे कर चालान, परिवहन रसीद या ई-वे बिल प्रस्तुत नहीं किए, जिससे पूरा लेन-देन फर्जी पाया गया। आरोपी द्वारा संचालित फर्म की जांच में यह भी सामने आया कि उसने सरकारी राजस्व को सीधे नुकसान पहुंचाया।

गिरफ्तारी की कार्रवाई गुरुवार की शाम की गई, जब आरोपी वैष्णो देवी माता मंदिर, डाला के सामने मौजूद था। आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन, कूट रचित दस्तावेजों से भरी एक फाइल, एक मारुति कार और ₹26,450 नकद बरामद किए गए। SIT ने आरोपी के खिलाफ विधिक कार्रवाई करते हुए मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

जांच में SIT टीम ने तकनीकी विश्लेषण, डेटा मॉनिटरिंग और फर्म के वित्तीय रिकॉर्ड की जाँच के आधार पर फर्जीवाड़े की योजना का खुलासा किया। आरोपी ने अपनी फर्जी फर्म के माध्यम से सरकारी करों से संबंधित नियमों का उल्लंघन करते हुए आईटीसी पास कराया और सरकारी खजाने से भारी राशि का लाभ उठाया।

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विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के फर्जी आईटीसी मामलों में न केवल कर विभाग की निगरानी बल्कि सतत डेटा वेरिफिकेशन तंत्र की भी आवश्यकता है। ऐसे मामलों में फर्मों के वित्तीय लेन-देन, दस्तावेज और ई-वे बिल की प्रमाणिकता की पुष्टि करने के लिए तकनीकी टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

SIT के निरीक्षक विवेक राजेश सरोज और कांस्टेबल किशन लाल, संदीप कुमार सहित अन्य टीम सदस्य भी इस जांच में शामिल थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ आगे की जांच जारी है और अन्य संबंधित व्यक्तियों या फर्मों की संलिप्तता की भी समीक्षा की जा रही है।

राज्य कर विभाग ने मामले की गहन जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की थी। इस टीम ने फर्म के खातों, डिजिटल लेन-देन और कागजी दस्तावेजों की तफ्तीश कर आरोपी के गबन की पूरी कहानी सामने लायी। इस कार्रवाई से न केवल सरकारी राजस्व की सुरक्षा हुई, बल्कि अन्य संभावित फर्जी फर्मों और आईटीसी घोटाले पर भी सतर्कता बढ़ी।

विशेष जांच टीम का कहना है कि ऐसे मामलों में सुपरविजन और तकनीकी ऑडिट का होना आवश्यक है, ताकि छोटे और बड़े स्तर पर सरकारी करों के दुरुपयोग को रोका जा सके। अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य में इस प्रकार की अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आसिफ अली की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट हो गया है कि फर्जी फर्म और कागजी लेन-देन के माध्यम से टैक्स बचाने की कोशिशें कानून के तहत सजा योग्य हैं, और विभाग अब ऐसे मामलों में पहले से अधिक सतर्क और सक्रिय है।

इस घटना ने सोनभद्र में व्यापारिक लेन-देन और कर अनुपालन के महत्व पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटीसी के दुरुपयोग को रोकने के लिए डिजिटल और तकनीकी ऑडिट तंत्र का मजबूती से पालन आवश्यक है।

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