नई दिल्ली: भारतीय महालेखा परीक्षक (CAG) ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) द्वारा दावा किए गए छूट और कटौतियों के कारण संभावित टैक्स इम्पैक्ट ₹74,766.39 करोड़ का खुलासा किया है। संसद में पेश इस रिपोर्ट में अनुपालन, रिपोर्टिंग और आंतरिक नियंत्रण में लगातार मौजूद खामियों को उजागर किया गया है।
रिपोर्ट में किसी भी विशिष्ट बैंक या NBFC का नाम नहीं लिया गया, लेकिन यह स्पष्ट किया गया कि यह 17 संस्थाओं पर केंद्रित थी, जिनमें 10 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक और सात NBFCs शामिल हैं। CAG ने आयकर विभाग के प्रदर्शन ऑडिट के तहत पिछले 2008 ऑडिट निष्कर्षों की फॉलो‑अप कार्रवाई और आरबीआई के एसेट क्लासिफिकेशन, आय मान्यता और प्राविजनिंग नियमों के अनुपालन की समीक्षा की।
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑडिट ने 2,463 मामलों में से 2,378 केसों का मूल्यांकन किया। इसमें 1,847 ऑडिट टिप्पणियाँ शामिल हैं, जिनमें 671 प्रणालीगत मुद्दे, 118 संबंधित पक्ष टिप्पणियाँ, 525 आंतरिक नियंत्रण की खामियां और 533 अनुपालन‑संबंधी मुद्दे शामिल हैं। संभावित टैक्स इम्पैक्ट का ₹74,766.39 करोड़ केवल अनुपालन से संबंधित है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पांच करदाताओं से अब तक ₹3,503.44 करोड़ की वसूली की जा चुकी है, जो ऑडिट निष्कर्षों की आंशिक स्वीकृति को दर्शाता है। वित्त मंत्रालय ने 25 अनुपालन संबंधी टिप्पणियों में से 21 मामलों को ₹799.38 करोड़ की राशि के साथ स्वीकार किया और दो मामलों को आंशिक रूप से स्वीकार किया, जिनकी राशि ₹24.50 करोड़ थी।
ऑडिट में कटौतियों में अक्सर पुनः प्राप्त न होने योग्य ऋण (bad debts), शंका योग्य ऋण (doubtful debts) और विशेष रिज़र्व में ट्रांसफर जैसी चीज़ों में लगातार अनियमितताएँ पाई गईं। इन तीन मुख्य श्रेणियों से संभावित टैक्स प्रभाव क्रमशः ₹33,459.08 करोड़, ₹2,971.26 करोड़ और ₹531.18 करोड़ रहा।
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CAG ने यह भी नोट किया कि नियम 6EA और आरबीआई की NPA परिभाषा में असंगति है। नियम 6EA के अनुसार NPA वह ऋण है जो छह महीने से अधिक लंबित है, जबकि आरबीआई इसे तीन महीने बाद NPA मानता है। इस अंतर ने अर्जित ब्याज (accrued interest) पर विवाद उत्पन्न किया।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 127 मामलों में ₹40,178.47 करोड़ के bad debts PAN नंबर के बिना लिखा गया और 58 मामलों में ₹1,69,782.47 करोड़ की कटौती बिना लेनदार विवरण के दी गई। इसी तरह, डेटा क्रॉस‑वेरिफिकेशन में 52 बैंक मामलों में ₹2,098.35 करोड़ टैक्स बताया गया जबकि वास्तविक वसूली ₹14,303 करोड़ थी।
CAG ने सुधारात्मक सुझाव देते हुए नियम 6EA को धारा 43D के अनुरूप बनाने, ऋण से जुड़े समझौतों पर कराधान को स्पष्ट करने और bad debt write-off की सत्यापन प्रणाली को मजबूत करने की सिफारिश की।
विश्लेषकों का कहना है कि इस रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि बैंकों और NBFCs के वित्तीय रिकॉर्ड में सतत निगरानी और मजबूत अनुपालन तंत्र की आवश्यकता है। पिछले उल्लंघनों से मिली सीख के आधार पर, विभाग को सुधारात्मक कार्रवाई में तेजी लानी होगी, ताकि संभावित राजस्व घाटे और कर विवादों को रोका जा सके।
CAG की यह रिपोर्ट वित्तीय क्षेत्र में टैक्स रिस्क मैनेजमेंट और आंतरिक नियंत्रण की मजबूती पर केंद्रित एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन संस्थाओं के लिए अब केवल नियमों का पालन ही नहीं बल्कि सिस्टमेटिक निगरानी और सत्यापन भी अनिवार्य हो गया है।
