वॉशिंगटन/न्यूयॉर्क: अमेरिका में वीजा नीति को लेकर एक नया विवाद उभर आया है, जिसमें भारतीय पेशेवरों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप समर्थक MAGA समूहों ने आरोप लगाया है कि H-1B वीजा नियमों में सख्ती के बाद कुछ एजेंसियां O-1A वीजा को “बैकडोर एंट्री” के रूप में इस्तेमाल करने का रास्ता दिखा रही हैं। इस आरोप के बाद सोशल मीडिया पर भारतीय समुदाय को लेकर नकारात्मक टिप्पणियों और बयानबाजी में तेज़ी देखी जा रही है।
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कुछ कंसल्टेंसी फर्म भारतीय पेशेवरों को O-1A वीजा के जरिए अमेरिका में प्रवेश पाने का विकल्प सुझा रही हैं। रिपोर्ट में एक फर्म द्वारा सोशल मीडिया पर दिए गए विज्ञापन का भी जिक्र है, जिसमें “थ्री-पिलर वीजा एक्विजिशन सिस्टम” के तहत O-1A को H-1B लॉटरी की अनिश्चितता से बचने का तरीका बताया गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई यूजर्स ने इस ट्रेंड को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कुछ यूजर्स ने इसे “फ्रॉड” करार देते हुए कहा कि O-1A वीजा को गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि अन्य ने इससे भी आगे जाकर सभी वीजा कार्यक्रमों को समाप्त करने की मांग तक कर डाली। इन प्रतिक्रियाओं ने पहले से मौजूद एंटी-इंडियन माहौल को और भड़का दिया है।
क्या है O-1A वीजा और क्यों है चर्चा में?
O-1A वीजा अमेरिका का एक नॉन-इमिग्रेंट वीजा कैटेगरी है, जो उन लोगों को दिया जाता है जिनके पास विज्ञान, शिक्षा, व्यवसाय या खेल के क्षेत्र में “असाधारण क्षमता” (extraordinary ability) होती है। इसके अलावा O-1B वीजा कला, फिल्म और टीवी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए होता है। O-2 और O-3 कैटेगरी क्रमशः सहायक कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों के लिए होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, O-1A वीजा पाना आसान नहीं है। इसके लिए आवेदक को राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता, बड़े पुरस्कार, प्रकाशित कार्य या अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान जैसे कई सख्त मानदंडों को पूरा करना होता है। कई मामलों में नोबेल पुरस्कार जैसे वैश्विक सम्मान का उदाहरण भी दिया जाता है।
इसके बावजूद, आलोचकों का आरोप है कि कुछ एजेंसियां इस वीजा को “आसान विकल्प” के रूप में पेश कर रही हैं, जिससे इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि या व्यापक स्तर पर दुरुपयोग के ठोस प्रमाण अभी सामने नहीं आए हैं।
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H-1B सख्ती के बाद बदला माहौल
अमेरिका में 2025 से H-1B वीजा नियमों को सख्त किया गया है। नए नियमों के तहत नए आवेदकों के लिए फीस में भारी बढ़ोतरी की गई है और चयन प्रक्रिया को उच्च वेतन वाले आवेदकों के पक्ष में वेटेड किया गया है। साथ ही, श्रम विभाग ने H-1B कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन में 33% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव भी रखा है।
इन बदलावों का असर साफ दिखने लगा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत से अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या में लगभग 50% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि भारतीय प्रवासियों की बॉर्डर क्रॉसिंग में 62% तक की कमी आई है। यह पिछले चार वर्षों में सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।
बढ़ती एंटी-इंडियन भावना पर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ वीजा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बढ़ती नस्लीय और राजनीतिक ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति भी है। 2023 से 2025 के बीच भारतीयों और दक्षिण एशियाई समुदाय के खिलाफ ऑनलाइन हेट स्पीच में 100% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
साइबर और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि वीजा जैसे जटिल मुद्दों को अक्सर सोशल मीडिया पर सरल और भ्रामक तरीके से पेश किया जाता है, जिससे गलतफहमियां और तनाव बढ़ते हैं। ऐसे माहौल में तथ्यों और आधिकारिक जानकारी पर आधारित चर्चा की जरूरत और भी बढ़ जाती है।
फिलहाल, O-1A वीजा को लेकर उठे इस विवाद ने अमेरिका में इमिग्रेशन नीति, भारतीय पेशेवरों की भूमिका और सामाजिक माहौल पर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले समय में और गहरा हो सकता है।
