खम्मम/साथुपल्ली: तेलंगाना के साथुपल्ली में एक बड़े साइबर फ्रॉड मामले में पुलिस ने गुरुवार को तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में CSB बैंक, चंद्रुगोंडा शाखा के ग्राहक सेवा अधिकारी (CRO) ओर्सु कृपा, मंड़ा श्रीहरि बाबू और शाखा संचालन प्रबंधक जे. राधाकृष्णा शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, कृपा और राधाकृष्णा चंद्रुगोंडा मंडल के निवासी हैं, जबकि श्रीहरि बाबू खम्मम जिले के पेनुबल्ली मंडल के बय्यन्नागुड़म गांव के मूल निवासी हैं। ये तीनों आरोपियों ने Udathaneni Vikas Chowdary, Boppana Nagapriya और CSB बैंक चंद्रुगोंडा शाखा प्रबंधक Akheel Abdul के साथ मिलकर इस साइबर अपराध में सहायता प्रदान की। मामले की प्राथमिकी हाल ही में साथुपल्ली पुलिस थाने में दर्ज की गई थी।
आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 318 (4), 319 (2), 336 (3), 338 रीडब्ल्यू 3 (5) और आईटी एक्ट की धारा 66‑D के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि विशेष टीमों का गठन शेष आरोपियों को पकड़ने के लिए किया गया है, जो अभी फरार हैं।
साइबर फ्रॉड की प्रकृति और बैंक कनेक्शन
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने बैंक के आंतरिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर ग्राहकों के खातों में अनधिकृत लेनदेन की सुविधा प्रदान की। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को झांसा देकर धन निकालता था और बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से लेनदेन को कवर किया जाता था।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले वित्तीय संस्थानों में आंतरिक निगरानी की कमी और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते संभव हो पाते हैं। “बैंकिंग कर्मचारियों की भूमिका और सतर्कता अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनकी सहमति या लापरवाही से बड़े साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जा सकता है,” एक साइबर अपराध विशेषज्ञ ने कहा।
पुलिस की कार्रवाई और जांच रणनीति
साथुपल्ली पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल का गठन किया है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके मोबाइल, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल लेनदेन की जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर यह पता लगाया जा रहा है कि कितने खातों और कितने धनराशियों को धोखाधड़ी के तहत ट्रांसफर किया गया।
“हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस गिरोह के सभी सदस्य और उनकी नेटवर्किंग का पता लगाया जाए। गिरफ्तार आरोपियों के माध्यम से हमें अन्य फरार आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी,” पुलिस सूत्र ने कहा।
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सरकार और बैंकिंग संस्थानों की सतर्कता
CSB बैंक के अधिकारियों ने भी मामले पर संज्ञान लिया है और आंतरिक ऑडिट टीम को जांच के लिए सक्रिय कर दिया है। बैंक ने कहा कि अगर किसी भी कर्मचारी की मिलीभगत साबित होती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैंक ग्राहकों को भी जागरूक करने के लिए साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन लेनदेन की सावधानियों पर विशेष सूचना दे रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर फ्रॉड में तेजी से बढ़ती तकनीक और ऑनलाइन लेनदेन की निर्भरता के कारण ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए यह आवश्यक है कि वे कर्मचारियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखें और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा को मजबूत करें।
आगे की कार्रवाई और संभावित परिणाम
पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने तक और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक मामला खुला रहेगा। जांच में साइबर अपराध, आंतरिक मिलीभगत और डिजिटल ट्रैकिंग के सभी पहलुओं को कवर किया जाएगा। यदि आरोप साबित होते हैं तो गिरफ्तार आरोपियों और बाकी फरार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाएगा।
साथुपल्ली के इस साइबर फ्रॉड केस से यह स्पष्ट होता है कि बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा और सतर्कता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल लेनदेन की पारदर्शिता और कर्मचारियों की जवाबदेही ही ऐसे अपराधों को रोकने में कारगर साबित हो सकती है।
