लखनऊ से सोनभद्र लाकर साइबर पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, बरामद हुए मोबाइल और बैंक कार्ड

एमबीबीएस दाखिले के नाम पर 22 लाख की ठगी, तीन गिरफ्तार

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By Roopa
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सोनभद्र: सोनभद्र पुलिस ने बुधवार को लखनऊ से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने एमबीबीएस में दाखिले का झांसा देकर 22 लाख रुपये की ठगी की। आरोपियों को गुरुवार को सोनभद्र लाकर न्यायालय में पेश किया गया और बाद में जेल भेज दिया गया।

जिले की एक महिला अभ्यर्थी ने 17 मार्च को सोनभद्र साइबर थाने में मामला दर्ज कराया। तहरीर में उन्होंने बताया कि अज्ञात लोगों ने उन्हें नीट परीक्षा के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश दिलाने का झांसा दिया। आरोपियों ने स्वयं को मेडिकल एडमिशन से जुड़े प्रभावशाली व्यक्ति बताकर सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में पक्की सीट दिलाने का दावा किया। इसके लिए विभिन्न चरणों में कुल 22 लाख रुपये ऑनलाइन माध्यम से उनके बैंक खातों में जमा करवाए गए।

थाने के इंस्पेक्टर ने बताया कि तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान पता चला कि यह गिरोह लंबे समय से एमबीबीएस प्रवेश के नाम पर छात्रों और अभ्यर्थियों को निशाना बना रहा था। आरोपी छात्रों की आशाओं और उनके परिवारों की भावनाओं का फायदा उठाकर बड़ी रकम हड़पने की योजना बनाते थे।

बुधवार की शाम लखनऊ के चारबाग बस स्टैंड के पास स्थित जूडियो शॉपिंग मॉल से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान संचित चंद्रा, पुत्र सुभाष चंद्रा निवासी कृष्णानगर, लखनऊ; विनय कुमार मौर्या, पुत्र स्व. जितेन्द्र मौर्या निवासी कंघी टोला, नेवाजगंज, लखनऊ; और आकाश सिन्हा, पुत्र जय प्रकाश सिन्हा निवासी बोईगपल्ली, सिकंदराबाद, आंध्र प्रदेश के रूप में हुई।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात एंड्रॉयड मोबाइल फोन, विभिन्न बैंकों के सात एटीएम कार्ड और एक बैंक का सादा चेक बरामद किया। इन उपकरणों और दस्तावेजों की मदद से पुलिस अब ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगा रही है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने ऑनलाइन बैंकिंग, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके कई अभ्यर्थियों से पैसे हड़पने का काम किया।

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विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल एडमिशन के नाम पर ठगी के मामले अब आम हो गए हैं, क्योंकि युवा और उनके परिवार उच्च शिक्षा के अवसरों को लेकर संवेदनशील होते हैं। ऐसे गिरोह डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए अपने झूठे दावों में और भी भरोसेमंद दिखते हैं।

पुलिस ने नागरिकों और अभ्यर्थियों से अपील की है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस तरह के झूठे एडमिशन एजेंटों के संपर्क में आए तो तुरंत साइबर पुलिस या स्थानीय थाने को सूचित करें और किसी भी दबाव में आकर पैसे न दें। अधिकारियों का कहना है कि समय पर कार्रवाई और जागरूकता ऐसे फ्रॉड को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि एमबीबीएस दाखिले के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह को पकड़ना चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि वे विभिन्न राज्यों में सक्रिय रहते हैं और ऑनलाइन लेन-देन के माध्यम से अपना निशान मिटा देते हैं। इसलिए पुलिस ने डिजिटल और फिजिकल दोनों माध्यमों से निगरानी बढ़ा दी है।

इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उच्च शिक्षा और प्रवेश प्रक्रिया के नाम पर होने वाले फ्रॉड पर नजर रखना आवश्यक है। सरकारी एजेंसियों और पुलिस की सतर्कता के बिना ऐसे गिरोह छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी आर्थिक हानि पहुंचा सकते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद अब जांच यह पता लगाने पर केंद्रित है कि आरोपियों ने इस तरह के और कितने मामलों में छात्रों को ठगा है और उनके द्वारा प्राप्त राशि का इस्तेमाल कैसे किया गया। आगामी दिनों में और भी गिरफ्तारी की संभावना है।

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