ग्रेटर नोएडा: सेक्टर-113 थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ऑनलाइन डेटिंग ऐप के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाकर ठगी और लूटपाट की घटनाओं को अंजाम देता था। इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान शिवम झा, सागर और कमल के रूप में हुई है।
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई लोगों को अपना शिकार बना चुका था। मुख्य आरोपी शिवम झा के खिलाफ पहले से ही सात आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिससे उसके आपराधिक नेटवर्क की गहराई का अंदाजा लगाया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से ₹30,000 नकद, चार मोबाइल फोन, एक कार, पीली धातु की चेन और दो फर्जी नंबर प्लेट बरामद किए गए हैं। बरामद सामान से संकेत मिलता है कि गिरोह योजनाबद्ध तरीके से अपराध को अंजाम देता था और अपनी पहचान छिपाने के लिए वाहन और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करता था।
ऑनलाइन जाल से शुरू होता था खेल
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी पहले डेटिंग ऐप के जरिए लोगों से संपर्क स्थापित करते थे। दोस्ती और भरोसे का माहौल बनाकर वे पीड़ितों को व्यक्तिगत मुलाकात के लिए राजी करते थे। इसके बाद उन्हें किसी सुनसान या पूर्व-निर्धारित स्थान पर बुलाया जाता था, जहां से असली अपराध की शुरुआत होती थी।
मुलाकात के दौरान आरोपी Baleno कार का इस्तेमाल करते हुए पीड़ित को अपने वाहन में बैठा लेते थे। इसके बाद उन्हें डराया-धमकाया जाता था और मोबाइल के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करवाकर पैसे ट्रांसफर कराए जाते थे। कई मामलों में पीड़ितों से सीधे लूटपाट भी की गई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर पीड़ितों को तुरंत पैसे देने के लिए मजबूर कर देते थे, जिससे कई लोग शिकायत दर्ज कराने से भी हिचकते थे।
कई पीड़ित, लाखों की ठगी का अंदेशा
अब तक की जांच में कई ऐसे पीड़ित सामने आए हैं, जिन्हें इस गिरोह ने अपना निशाना बनाया था। हालांकि, पुलिस को आशंका है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई लोग सामाजिक कारणों से शिकायत दर्ज नहीं कराते।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, आरोपियों ने इस तरीके से लाखों रुपये की ठगी की है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है, ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों का पता लगाया जा सके।
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सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अपराध साइबर फ्रॉड और पारंपरिक अपराध के बीच की कड़ी बनते जा रहे हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अपराधी पहले पीड़ित को फंसाते हैं और फिर ऑफलाइन तरीके से लूटपाट या ठगी को अंजाम देते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, “ऐसे मामलों में अपराधी सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं, जहां वे पहले भरोसा जीतते हैं और फिर उसी का फायदा उठाकर अपराध करते हैं। जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।”
पुलिस की चेतावनी और अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति से मिलने से पहले पूरी सावधानी बरतें, खासकर तब जब संपर्क ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए हुआ हो। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या लेन-देन की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते समय अपनी निजी जानकारी साझा करने से बचें और किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी की स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत मदद लें।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।
यह घटना एक बार फिर इस बात की चेतावनी देती है कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता और जागरूकता बेहद जरूरी है। ऑनलाइन दोस्ती के पीछे छिपे खतरों को नजरअंदाज करना कभी-कभी भारी पड़ सकता है।
