मेरठ: मेरठ में हाल ही में Base Band Unit (BBU) चोरी के मामले ने सुरक्षा और साइबर जगत में हलचल मचा दी है। इस मामले में पकड़े गए आरोपी शाहरुख ने बिलाल नामक सहयोगी के साथ मिलकर बीबीयू को दिल्ली के मुस्तफाबाद स्थित एक स्क्रैप कारोबारी के पास पहुंचाया। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह उपकरण हांगकांग के रास्ते चीन भेजा जा रहा था। पुलिस का मानना है कि इसके जरिए हजारों भारतीयों का डाटा चीन तक पहुंचाया जा चुका है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बीबीयू मोबाइल टावर पर लगी होती है और इसके सक्रिय होने पर क्षेत्र का जियो और एयरटेल नेटवर्क प्रभावित हो जाता है। बीबीयू और मोबाइल टावर में लगी चिप्स में उस इलाके के सक्रिय मोबाइल नंबरों का डाटा रहता है। विशेषज्ञों की मदद से जुटाई गई जानकारी में पता चला कि पहले भी इसी तरह के मामले सामने आए थे, जिनमें भारतीय नागरिकों का डाटा विदेश भेजकर साइबर ठगी की कोशिश की गई थी।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दिल्ली में जांच पड़ताल तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि केवल साइबर ठगी तक ही सीमित नहीं, बल्कि किसी सेना या अन्य संवेदनशील पदों पर बैठे व्यक्तियों का डाटा भी इस नेटवर्क के माध्यम से अन्य देश भेजा जा सकता है। इस कारण सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बढ़ा दी है और मामले की गहन पड़ताल की जा रही है।
मुजफ्फरनगर से जुड़े तार: मुजफ्फरनगर पुलिस ने 25 मार्च को खतौली निवासी वसीम और मवाना के कल्याणपुर निवासी वकील को अवैध टेलीफोन एक्सचेंज चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि ये आरोपी शाहरुख से जुड़े हैं। शाहरुख मुजफ्फरनगर के कस्बा मीरापुर के एक स्थानीय नेता का रिश्तेदार बताया गया है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में दो और आरोपी अभी भी फरार हैं और उनके पतों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference
अंतरराष्ट्रीय तार: 11 जून 2022 को इंडो-नेपाल बॉर्डर से दो चीनी नागरिक लु लैंग और यूं हेलंग को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उनके सहयोगी गुरुग्राम से जू फाई और उसकी महिला मित्र नागालैंड की रेनुओ पटेखो को पकड़ा गया। इस जांच के दौरान रवि नटवरलाल का नाम भी सामने आया। पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि आरोपी पुराने मोबाइल स्क्रैप के जरिए हजारों भारतीयों का डाटा चीन भेज चुके थे। गौतमबुद्धनगर पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई की थी, लेकिन बीबीयू चोरी से जुड़ा यह नया मामला सुरक्षा और साइबर जगत के लिए और चिंता बढ़ाने वाला है।
पुलिस ने बताया कि बीबीयू में मौजूद चिप्स और डिवाइस में उस क्षेत्र के मोबाइल नंबरों का डेटा रिकॉर्ड होता है। इसके जरिए किसी भी व्यक्ति का कॉल, लोकेशन और मोबाइल एक्टिविटी ट्रैक की जा सकती है। यदि यह डाटा गलत हाथों में चला जाता है, तो साइबर ठगी, आर्थिक नुकसान या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
पुलिस का कहना है कि शाहरुख और उसके सहयोगियों के नेटवर्क से जुड़ी हर कड़ी की जांच की जा रही है। इसके अलावा, इंडो-नेपाल बॉर्डर और हांगकांग तक पहुंचने वाले तारों की भी छानबीन की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल निजी डेटा चोरी का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि Base Band Unit चोरी सिर्फ तकनीकी अपराध नहीं है, बल्कि इसके जरिए बड़े पैमाने पर साइबर अपराध और जासूसी की संभावना मौजूद है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच में जुटी हैं और हर कड़ी से जानकारी इकट्ठा कर अगले कदम की तैयारी कर रही हैं।
इस बीच, नागरिकों को मोबाइल और डिजिटल डिवाइस के इस्तेमाल में सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल नेटवर्क और डेटा से जुड़े मामलों में नियमित निगरानी और समय पर अपडेट बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और जासूसी से बचा जा सके।
