UP में फर्जी फर्मों, फर्जी इनवॉइस और ITC fraud के बड़े नेटवर्क की जांच में जुटी एजेंसियां, केशवानी अब्बास हुसैन गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई तेज।

फर्जी फर्मों का जाल हुआ बेनकाब: एक कंपनी से शुरू हुई जांच 100 से ज्यादा फर्मों तक पहुंची, कई आरोपी रडार पर

Team The420
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लखनऊ: Uttar Pradesh में फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों की जीएसटी चोरी के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच की शुरुआत भले ही एक कंपनी से हुई हो, लेकिन अब यह मामला 100 से ज्यादा संदिग्ध फर्मों तक फैल चुका है। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों के सामने एक संगठित नेटवर्क की तस्वीर उभरकर सामने आई है, जिसमें कई और आरोपी रडार पर हैं।

राजधानी Lucknow में सामने आए इस मामले ने जीएसटी चोरी के तरीके और उसके नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में केवल एक फर्म का नाम सामने आया था, लेकिन जैसे-जैसे पड़ताल आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई और कंपनियों की परतें खुलती चली गईं। अब तक 100 से अधिक ऐसी फर्मों की पहचान हो चुकी है, जो कागजों पर मौजूद थीं लेकिन असल में उनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था।

इस मामले में पहले ही एक आरोपी केशवानी अब्बास हुसैन को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसकी गिरफ्तारी के बाद जांच ने तेजी पकड़ी। जांच में सामने आया कि उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी कंपनियों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। इन कंपनियों के जरिए फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल खेलकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

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जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का संचालन बेहद सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था। इसमें कुछ सीमित मोबाइल नंबरों और दो-तीन बैंक खातों का इस्तेमाल कर सैकड़ों फर्में बनाई गईं। यही नहीं, इन फर्मों के जरिए लगातार लेनदेन दिखाकर टैक्स चोरी को अंजाम दिया जाता रहा, जिससे पहली नजर में यह सब कुछ सामान्य व्यापारिक गतिविधि जैसा लगे।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जीएसटी चोरी के मामलों में इस तरह के नेटवर्क आम होते जा रहे हैं, जहां फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर टैक्स सिस्टम को चकमा दिया जाता है। इस मामले में भी यही पैटर्न सामने आया है, जहां एक ही गिरोह कई नामों से कंपनियां बनाकर पूरे सिस्टम का फायदा उठा रहा था।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आमतौर पर जब ऐसे मामलों में केस दर्ज होता है, तो केवल दो-चार फर्मों का ही जिक्र होता है। लेकिन गहराई से जांच करने पर सैकड़ों फर्मों का नेटवर्क सामने आता है। यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां अपनी रणनीति में बदलाव पर जोर दे रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जीएसटी विभाग को भी अपनी जांच प्रक्रिया को और मजबूत करने की सलाह दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि केस दर्ज करने से पहले ही संबंधित व्यक्ति या गिरोह से जुड़ी सभी फर्मों की पहचान कर ली जाए, तो जांच अधिक प्रभावी और तेज हो सकती है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि बड़े नेटवर्क को एक साथ पकड़ना भी आसान होगा।

इस मामले ने यह भी साफ कर दिया है कि डिजिटल और कागजी स्तर पर कंपनियां बनाना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है, जिसका फायदा उठाकर ठग बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी कर रहे हैं। ऐसे में सिस्टम को मजबूत करने और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को सख्त बनाने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है।

फिलहाल जांच जारी है और कई अन्य संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस नेटवर्क के और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह मामला केवल एक जीएसटी चोरी का नहीं, बल्कि एक बड़े संगठित आर्थिक अपराध का संकेत है, जिसमें तकनीक और सिस्टम की खामियों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का खेल खेला गया। अब यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को किस हद तक तोड़ पाती हैं और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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