नई दिल्ली: साइबर अपराध अब केवल डेटा चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक संगठित और मुनाफे वाला डिजिटल कारोबार बन चुका है। ‘Leak Bazaar’ नाम का एक नया प्लेटफॉर्म इस बदलते ट्रेंड का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है, जो चोरी किए गए कॉर्पोरेट डेटा को प्रोसेस कर उसे बार-बार बेचने योग्य प्रोडक्ट में बदल रहा है।
जानकारी के अनुसार, ‘Snow’ नाम के एक हैकर, जो ‘SnowTeam’ से जुड़ा बताया जा रहा है, ने 25 मार्च 2026 को एक रूसी साइबर क्राइम फोरम पर इस प्लेटफॉर्म का विज्ञापन जारी किया। इसी दिन इसका हिडन सर्विस नेटवर्क भी सक्रिय हो गया, जिससे यह संकेत मिला कि यह कोई शुरुआती प्रयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साइबर ऑपरेशन है।
सिर्फ डेटा लीक नहीं, ‘पोस्ट-प्रोसेसिंग इंडस्ट्री’ का उदय
‘Leak Bazaar’ खुद को पारंपरिक डेटा लीक वेबसाइट के रूप में पेश नहीं करता। इसके बजाय यह एक पोस्ट-एक्सफिल्ट्रेशन प्रोसेसिंग सर्विस के तौर पर काम करता है, जहां चोरी किए गए कच्चे डेटा को साफ, व्यवस्थित और उपयोगी रूप में बदला जाता है।
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आमतौर पर साइबर हमलों में जो डेटा हासिल होता है, वह अव्यवस्थित और भारी होता है—जिसमें सिस्टम फाइल्स, डुप्लीकेट डेटा और अधूरी या खराब संरचना वाले डेटाबेस शामिल होते हैं। ऐसे डेटा का सीधा इस्तेमाल मुश्किल होता है।
‘Leak Bazaar’ इसी समस्या को अवसर में बदल रहा है। प्लेटफॉर्म मशीन लर्निंग आधारित टेक्स्ट एनालिसिस, डेटाबेस रिवर्स इंजीनियरिंग, ERP डेटा प्रोसेसिंग और मानव विश्लेषण के जरिए डेटा को साफ और संरचित करता है। इसके बाद इसे खरीदारों के लिए एक ‘इंटेलिजेंस सर्विस’ के रूप में पेश किया जाता है।
डेटा को ‘प्रोडक्ट’ में बदलने का नया मॉडल
इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह डेटा को उसके मूल रूप में नहीं बेचता, बल्कि उसे खरीदारों की जरूरत के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करता है।
उदाहरण के तौर पर, डेटा को फाइनेंशियल रिपोर्ट, मर्जर-एक्विजिशन (M&A) जानकारी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाइल्स और पर्सनल डेटा रिकॉर्ड्स जैसे हिस्सों में बांटा जाता है। इससे अलग-अलग प्रकार के खरीदार—जैसे फाइनेंशियल ट्रेडर्स, प्रतिस्पर्धी कंपनियां और पहचान चोरी करने वाले गिरोह—अपनी जरूरत के मुताबिक डेटा खरीद सकते हैं।
यह मॉडल साइबर अपराध को एक संगठित मार्केटप्लेस का रूप देता है, जहां डेटा केवल एक बार चोरी नहीं होता, बल्कि उसे प्रोसेस कर कई बार बेचा जाता है।
बड़े कॉर्पोरेट डेटा पर फोकस, तय है कमाई का फार्मूला
‘Leak Bazaar’ मुख्य रूप से उन कंपनियों के डेटा को प्राथमिकता देता है जिनका वार्षिक राजस्व 10 मिलियन डॉलर से अधिक है। प्लेटफॉर्म कम से कम 100 GB डेटा स्वीकार करता है और 1 TB या उससे अधिक डेटा को अधिक मूल्यवान मानता है।
साथ ही, केवल वही डेटा स्वीकार किया जाता है जो पहले सार्वजनिक नहीं हुआ हो और मुख्य रूप से अंग्रेजी भाषा में हो। इससे साफ है कि प्लेटफॉर्म का लक्ष्य उच्च गुणवत्ता और अधिक मुनाफा देने वाले डेटा पर केंद्रित है।
लेनदेन के लिए ‘Exploit’ जैसे गारंटर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे खरीदार और विक्रेता के बीच भरोसा बना रहता है। कमाई के मॉडल में डेटा सप्लायर को लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है।
डेटा को दो तरीकों से बेचा जाता है—एक बार के एक्सक्लूसिव सौदे के रूप में या फिर कई खरीदारों को बार-बार बेचने के लिए। यही मॉडल इस प्लेटफॉर्म को और अधिक खतरनाक बनाता है।
रैनसमवेयर के बाद भी खत्म नहीं होता खतरा
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Leak Bazaar’ जैसे प्लेटफॉर्म यह संकेत देते हैं कि अब अगर कोई कंपनी फिरौती देने से इनकार कर देती है, तब भी उसका डेटा सुरक्षित नहीं रहता।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, “साइबर अपराधी अब डेटा चोरी के बाद उसे प्रोसेस कर लंबे समय तक मुनाफा कमाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। यह साइबर अपराध के एक नए और अधिक खतरनाक चरण की शुरुआत है।”
कंपनियों के लिए अलर्ट: सुरक्षा रणनीति बदलना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के प्लेटफॉर्म के उभरने के बाद कंपनियों को अपनी साइबर सुरक्षा रणनीति को पूरी तरह से बदलना होगा। अब केवल डेटा चोरी को रोकना पर्याप्त नहीं है, बल्कि डार्क वेब मॉनिटरिंग, डेटा क्लासिफिकेशन और लंबी अवधि की रिस्क मैनेजमेंट रणनीतियां भी अपनानी होंगी।
‘Leak Bazaar’ का उभरना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि साइबर अपराध अब एक संगठित, संरचित और लगातार चलने वाला बिजनेस मॉडल बन चुका है। ऐसे में खतरा सिर्फ डेटा चोरी तक सीमित नहीं, बल्कि उसके बाद लंबे समय तक जारी रहने वाला जोखिम बन गया है।
