पुणे में credit card protection plan के नाम पर phishing link भेजकर software engineer से ₹4.78 लाख की ठगी की जांच।

क्रेडिट कार्ड ‘प्रोटेक्शन प्लान’ के नाम पर ठगी: पुणे में फर्जी बैंक कॉल से टेक्नीशियन से ₹4.8 लाख की ठगी

Team The420
5 Min Read

पुणे: महाराष्ट्र के Pune में क्रेडिट कार्ड फ्रॉड का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 31 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर से करीब ₹4.8 लाख की ठगी कर ली गई। आरोपी ने खुद को बैंक का प्रतिनिधि बताकर फोन किया और एक फर्जी “प्रोटेक्शन प्लान” के नाम पर पीड़ित को जाल में फंसा लिया। यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि फिशिंग कॉल और मालिशियस लिंक के जरिए साइबर अपराधी किस तरह आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।

शिकायत के अनुसार, जनवरी में पीड़ित को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक के क्रेडिट कार्ड विभाग से जुड़ा बताया और कहा कि उसके कार्ड से जुड़ा “प्रोटेक्शन प्लान” जल्द समाप्त होने वाला है। आरोपी ने यह भी कहा कि अगर इस प्लान को तुरंत रद्द नहीं किया गया तो ₹3,999 की वार्षिक फीस स्वतः खाते से काट ली जाएगी।

फिशिंग लिंक से ली गई गोपनीय जानकारी

जब पीड़ित ने कहा कि उसने ऐसा कोई प्लान नहीं लिया है, तो आरोपी ने दावा किया कि कुछ ट्रांजैक्शन फेल होने के कारण यह सेवा स्वतः सक्रिय कर दी गई थी। भरोसा दिलाने के लिए उसने एक लिंक भेजा और कहा कि इसी के जरिए प्लान को तुरंत रद्द किया जा सकता है।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

पीड़ित ने उस लिंक पर क्लिक किया और मांगी गई जानकारी भर दी। माना जा रहा है कि इसमें क्रेडिट कार्ड से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और ऑथेंटिकेशन डिटेल शामिल थीं, जिससे आरोपी को खाते तक अनधिकृत पहुंच मिल गई।

कुछ ही देर बाद पीड़ित को अलर्ट मिला कि उसके क्रेडिट कार्ड से करीब ₹4.78 लाख का ट्रांजैक्शन हो चुका है। ठगी का एहसास होते ही उसने संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया।

देरी से हुआ एहसास, तुरंत हुआ नुकसान

जांच में सामने आया है कि यह ठगी बहुत तेजी से अंजाम दी गई, जिससे पीड़ित को प्रतिक्रिया देने का मौका नहीं मिला। चूंकि ट्रांजैक्शन सामान्य कार्ड पेमेंट की तरह हुआ, इसलिए शुरुआत में यह संदिग्ध नहीं लगा।

बाद में पीड़ित ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर धोखाधड़ी और साइबर अपराध का मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब कॉल डिटेल, आईपी लॉग और ट्रांजैक्शन ट्रेल खंगालकर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

सोशल इंजीनियरिंग से बढ़ रहा खतरा

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी “सोशल इंजीनियरिंग” तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। वे डर और जल्दबाजी का माहौल बनाकर लोगों को संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए मजबूर कर देते हैं।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh के अनुसार, “अपराधी डर और तात्कालिकता का फायदा उठाकर लोगों को फर्जी लिंक पर क्लिक करने और गोपनीय जानकारी साझा करने के लिए मजबूर करते हैं। पारंपरिक धोखाधड़ी अब डिजिटल टूल्स के साथ मिलकर और खतरनाक हो गई है।”

कैसे बचें ऐसे साइबर फ्रॉड से

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बैंक कभी भी फोन कॉल या लिंक के जरिए कार्ड नंबर, CVV, OTP या लॉगिन डिटेल नहीं मांगते। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और इस तरह के कॉल की पुष्टि हमेशा बैंक के आधिकारिक माध्यम से करें।

साथ ही, ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखना और खर्च की लिमिट सेट करना भी अनधिकृत लेनदेन को समय रहते पकड़ने में मदद कर सकता है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

यह मामला डिजिटल लेनदेन के दौर में बढ़ती जागरूकता की जरूरत को रेखांकित करता है। जैसे-जैसे बैंकिंग सेवाएं ऑनलाइन हो रही हैं, वैसे-वैसे व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ रही है।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध कॉल या संदेश मिलने पर तुरंत सतर्क रहें और इसकी सूचना संबंधित एजेंसियों को दें। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच समय पर जागरूकता और सावधानी ही सबसे प्रभावी बचाव साबित हो सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article