गुरुग्राम में SIM बॉक्स के जरिए चल रहे इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा, कंबोडिया-फिलीपींस कनेक्शन की जांच तेज

SIM बॉक्स के जरिए साइबर ठगी का जाल: CBI ने कंपनी डायरेक्टर्स को दबोचा, 108 फर्जी सिम का खुलासा

Team The420
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नई दिल्ली: साइबर ठगी के तेजी से बदलते तौर-तरीकों के बीच एक और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां सिम बॉक्स तकनीक के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा था। इस मामले में Central Bureau of Investigation (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कंपनी डायरेक्टर्स को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर एक फर्जी कंपनी बनाकर बल्क सिम कार्ड हासिल किए और उन्हें साइबर अपराध में इस्तेमाल किया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद विवाल और मोहम्मद दिलशाद के रूप में हुई है, जिन्हें Meerut से पकड़ा गया। जांच में सामने आया है कि इन दोनों ने एक कंपनी बनाकर बड़ी संख्या में सिम कार्ड लिए, जिनका इस्तेमाल सिम बॉक्स के जरिए फर्जी कॉल करने और लोगों को ठगने में किया जा रहा था।

जांच एजेंसी के अनुसार, जनवरी 2025 में बनाई गई इस कंपनी के नाम पर 108 सिम कार्ड लिए गए थे। शुरुआत में इन्हें कंपनी के कर्मचारियों के उपयोग के लिए बताया गया, लेकिन बाद में ये सिम कार्ड साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल होते पाए गए। नागरिकों ने इन नंबरों के खिलाफ National Cyber Crime Reporting Portal और ‘चक्षु’ प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मामला जांच के दायरे में आया।

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सिम बॉक्स एक हार्डवेयर डिवाइस होता है, जो इंटरनेट के जरिए बड़ी संख्या में कॉल को रूट करता है, जिससे कॉल का वास्तविक स्रोत छिप जाता है। इस तकनीक का इस्तेमाल कर आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या अन्य विश्वसनीय व्यक्ति बताकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें डराकर या लालच देकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर करते थे।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस तरह के कॉल साइबर ठगी की शुरुआती कड़ी होते हैं, जहां पहले पीड़ित को विश्वास में लिया जाता है और फिर उसे अलग-अलग बहानों से पैसे भेजने के लिए कहा जाता है। कई मामलों में आरोपियों ने खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराया और उनसे बैंकिंग डिटेल्स या पैसे हासिल किए।

CBI ने इस मामले में मेरठ और Noida में कुल छह स्थानों पर छापेमारी की। इन छापों में आरोपियों के ठिकानों के अलावा उनके सहयोगियों के ठिकाने, सिम बॉक्स इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े स्थान, एक टेलीकॉम कंपनी के जोनल ऑफिस और सिम वेरिफिकेशन से जुड़े एक निजी संस्था के कर्मचारी के ठिकाने भी शामिल थे।

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूत बरामद किए हैं, जिनमें लैपटॉप, हार्ड डिस्क, मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में सिम कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज भी मिले हैं, जो इस नेटवर्क के संचालन और विस्तार को दर्शाते हैं। बरामद सिम कार्ड्स में एक विदेशी (नेपाल) सिम कार्ड भी शामिल है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क केवल दो लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा हो सकता है। सिम कार्ड्स की इतनी बड़ी संख्या और सिम बॉक्स जैसी तकनीक का इस्तेमाल इस बात की ओर इशारा करता है कि यह ठगी सुनियोजित तरीके से और बड़े पैमाने पर की जा रही थी।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा, “सिम बॉक्स फ्रॉड आज के समय में साइबर अपराध का बेहद खतरनाक रूप बन चुका है। अपराधी सोशल इंजीनियरिंग और तकनीकी हेरफेर का इस्तेमाल कर खुद को विश्वसनीय अधिकारी के रूप में पेश करते हैं और लोगों को मानसिक दबाव में डालकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता और तुरंत रिपोर्टिंग ही सबसे बड़ा बचाव है।”

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि सिम बॉक्स फ्रॉड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, क्योंकि यह तकनीक कॉल के स्रोत को छिपाने और जांच एजेंसियों को भ्रमित करने में मदद करती है। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया की जरूरत है।

यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि साइबर अपराधी किस तरह नई तकनीकों का इस्तेमाल कर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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