दिल्ली साइबर पुलिस की कार्रवाई में म्यूल अकाउंट्स के जरिए निवेश ठगी करने वाले गिरोह के 5 आरोपी गिरफ्तार, दुबई कनेक्शन की जांच जारी।

म्यूल अकाउंट के सहारे करोड़ों की निवेश ठगी: दिल्ली साइबर पुलिस ने गिरोह का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

Team The420
5 Min Read

नई दिल्ली: निवेश पर भारी रिटर्न का लालच देकर ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का दिल्ली पुलिस की साइबर टीम ने भंडाफोड़ किया है। दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए देशभर में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे। जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क महाराष्ट्र से संचालित हो रहा था और इसके तार दुबई तक जुड़े हुए हैं।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान श्रीधर दिलीप इंगले (25), आर्चिर्यन गोरक्ष कांबले (21), अजिज मिरान शेख (25), प्रणव जलिंदर गुलदगड (24) और विशाल दुर्गादास बछल (25) के रूप में हुई है। सभी आरोपी महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों से जुड़े हैं और संगठित तरीके से बैंक खातों की व्यवस्था कर साइबर ठगों को उपलब्ध कराते थे।

मामले की शुरुआत 4 सितंबर 2025 को हुई, जब अरुणाचल प्रदेश के निवासी, जो वर्तमान में दिल्ली में रह रहे थे, ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उन्हें एक कथित कंपनी ‘Next Billion Technology Pvt Ltd’ के नाम पर शेयर बाजार में निवेश करने का झांसा दिया गया। आरोप है कि 7 जुलाई 2025 को ओटीसी अकाउंट खुलवाने के बाद उन्हें ‘परिणीति जैन’ नाम की महिला और उसके साथियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क कर निवेश के लिए प्रेरित किया।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

झांसे में आकर पीड़ित ने आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में कुल ₹12,22,670 ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उसे ठगी का एहसास हुआ, तब उसने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण, सर्विलांस और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन पड़ताल की गई। डिजिटल साक्ष्यों और मनी ट्रेल के आधार पर पुलिस टीम महाराष्ट्र के श्रीरामपुर पहुंची, जहां मुख्य आरोपी श्रीधर दिलीप इंगले को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने अपने अन्य साथियों और पूरे नेटवर्क के काम करने के तरीके का खुलासा किया।

आरोपी ने बताया कि वह कमीशन के आधार पर म्यूल बैंक अकाउंट्स उपलब्ध कराता था। ये अकाउंट्स आम लोगों से हासिल किए जाते थे, जिन्हें या तो लालच देकर या धोखे से उनके बैंक खाते इस्तेमाल के लिए लिए जाते थे। बाद में इन खातों को साइबर ठगी के लेनदेन के लिए नियंत्रित किया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी इन खातों को अपने दुबई स्थित सहयोगी ‘चैतन्य’ को उपलब्ध कराते थे, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था। इसके बाद कई स्थानों पर छापेमारी कर अन्य चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे बड़े पैमाने पर म्यूल अकाउंट्स जुटाकर साइबर ठगी गिरोहों को सप्लाई करते थे। इन खातों के जरिए देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले पीड़ितों से ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनका इस्तेमाल अपराध में किया जा रहा था। इसके अलावा 35 बैंक खातों की जानकारी भी मिली है, जिनका उपयोग ठगी के लेनदेन में किया गया। प्रारंभिक जांच में इन खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं।

यह मामला इस बात को उजागर करता है कि साइबर अपराधी किस तरह तकनीक और बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। निवेश के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जहां फर्जी कंपनियां और नकली प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को बड़े रिटर्न का लालच दिया जाता है।

जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क के अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। खासकर दुबई कनेक्शन और अन्य अंतरराष्ट्रीय लिंक की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों को आगाह किया है कि वे किसी भी अनजान निवेश प्लेटफॉर्म या व्यक्ति के झांसे में न आएं और निवेश से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें

हमसे जुड़ें

Share This Article