फ्लैट में बना रखा था हाई-टेक कंट्रोल रूम, 21 स्मार्टफोन और दर्जनों ATM कार्ड बरामद; मास्टरमाइंड फरार

पटना से चल रहा था पैन-इंडिया साइबर ठगी नेटवर्क: ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, 5 आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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पटना: बिहार की राजधानी पटना में साइबर ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, जो ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के नाम पर देशभर में लोगों को निशाना बना रहा था। शास्त्री नगर इलाके में एक साधारण दिखने वाले फ्लैट से संचालित इस गिरोह ने तकनीक और फर्जी ऑफर्स के जरिए करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने शिवपुरी क्षेत्र स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट में छापेमारी की। बाहर से सामान्य नजर आने वाला यह फ्लैट अंदर से पूरी तरह हाई-टेक कंट्रोल रूम में तब्दील था। यहां से आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों, खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में लोगों को ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फंसाते थे।

छापेमारी के दौरान मौके से बड़ी मात्रा में डिजिटल और बैंकिंग से जुड़े उपकरण बरामद किए गए। जब्त सामानों में 21 महंगे स्मार्टफोन, 24 सक्रिय सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड, चेक बुक और दो हाई-स्पीड लैपटॉप शामिल हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह लुभावने बोनस और इनाम के झांसे देकर लोगों को गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर जोड़ता था, जिसके बाद उनके बैंक खातों से पैसे निकाल लिए जाते थे।

मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी पहचान शशांक शेखर, मनीष कुमार, सूर्यदीप राज, रिशु कुमार और सचिन कुमार के रूप में हुई है। सभी आरोपी बिहार के अलग-अलग जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ है कि इन युवकों को इस अवैध नेटवर्क में काम करने के लिए मासिक वेतन पर रखा गया था। उन्हें ₹15,000 से ₹30,000 तक की सैलरी दी जाती थी, जबकि असली मुनाफा गिरोह का सरगना हासिल करता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी तकनीकी रूप से प्रशिक्षित थे और उन्हें लोगों को फोन कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया के जरिए फंसाने की जिम्मेदारी दी गई थी। ये लोग स्क्रिप्ट के जरिए बातचीत करते थे, जिससे सामने वाले को शक न हो और वह आसानी से जाल में फंस जाए।

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पुलिस के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड अंकित कुमार है, जो छापेमारी के दौरान मौके से फरार हो गया। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। साथ ही, गिरोह के बैंक खातों और लेनदेन की जांच की जा रही है, ताकि ठगी की कुल रकम और नेटवर्क के विस्तार का पता लगाया जा सके।

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में “सोशल इंजीनियरिंग” का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिसमें लोगों को लालच और भरोसे के जरिए जाल में फंसाया जाता है। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “आज के साइबर अपराधी तकनीक से ज्यादा मनोविज्ञान का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी जैसे ट्रेंडिंग प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर ये लोग तेजी से लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।”

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी अब छोटे स्तर से आगे बढ़कर संगठित तरीके से देशभर में नेटवर्क चला रहे हैं। खासकर किराए के फ्लैट और डिजिटल उपकरणों के जरिए ऐसे गैंग अपनी पहचान छिपाकर लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान ऑनलाइन गेमिंग ऑफर या निवेश के लालच में आने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है। इसके अलावा, बैंकिंग डिटेल्स साझा करने से बचना और संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करना ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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