ऑनलाइन भर्ती में बढ़ता खतरा; ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे रच रहे भरोसेमंद जाल, विशेषज्ञों ने दी सख्त चेतावनी

यूपी बोर्ड की फर्जी वेबसाइट से ठगी: 7,000 नकली अंकपत्र बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दो गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों और अभिभावकों से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। साइबर क्राइम पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आजमगढ़ से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो पिछले कई वर्षों से नकली अंकपत्र और प्रमाणपत्र तैयार कर बेच रहे थे। जांच में सामने आया है कि आरोपी अब तक करीब 7,000 फर्जी दस्तावेज बाजार में बेच चुके हैं।

मामले की शुरुआत तब हुई जब माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की शिकायत पर सितंबर 2025 में साइबर थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया था कि यूपी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट की तरह दिखने वाली एक फर्जी वेबसाइट तैयार की गई है, जिसके माध्यम से लोगों को अंक बढ़वाने और डुप्लीकेट मार्कशीट दिलाने का लालच दिया जा रहा है।

जांच के दौरान साइबर टीम ने डिजिटल ट्रेल और ऑनलाइन गतिविधियों को खंगालते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शशि प्रकाश राय उर्फ राजन शर्मा और मनीष कुमार राय के रूप में हुई है, जो आजमगढ़ जिले के बरदह थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे ‘श्री एजुकेशन’ नाम से एक कॉल सेंटर संचालित करते थे। इस कॉल सेंटर के जरिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन चलाए जाते थे, जिनमें दावा किया जाता था कि कम अंक पाने वाले छात्र अपने मार्क्स बढ़वा सकते हैं या नई मार्कशीट बनवा सकते हैं। इन विज्ञापनों के झांसे में आकर छात्र और अभिभावक संपर्क करते थे।

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इसके बाद आरोपियों द्वारा विभिन्न बोर्डों और विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्र तैयार किए जाते थे। प्रत्येक दस्तावेज के लिए ग्राहकों से ₹4,000 से ₹5,000 तक वसूले जाते थे। तैयार दस्तावेज को कोरियर के माध्यम से भेज दिया जाता था, जिससे ठगी का पूरा नेटवर्क लंबे समय तक बिना संदेह के चलता रहा।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी वर्ष 2014 से इस अवैध गतिविधि में लिप्त थे और धीरे-धीरे उन्होंने अपना नेटवर्क विस्तार करते हुए हजारों लोगों को निशाना बनाया। फर्जी वेबसाइट और कॉल सेंटर के संयोजन ने इस गिरोह को लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद की।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, 42 फर्जी मोहरें, 217 तैयार फर्जी अंकपत्र, कंप्यूटर सेट, प्रिंटर और अन्य तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल नकली दस्तावेज तैयार करने और ग्राहकों से संपर्क साधने के लिए किया जाता था।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े में सोशल इंजीनियरिंग का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है, जहां छात्रों की कमजोरी और जल्दी परिणाम पाने की इच्छा का फायदा उठाया जाता है। फर्जी वेबसाइट्स और ऑनलाइन विज्ञापनों के जरिए भरोसा पैदा कर ठगी को अंजाम दिया जाता है।

मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और अब पुलिस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों, वित्तीय लेनदेन और इस नेटवर्क के विस्तार की जांच कर रही है। आशंका है कि इस रैकेट से जुड़े और भी लोग जल्द गिरफ्त में आ सकते हैं।

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