संभल: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में आधार कार्ड से जुड़ा एक बड़ा साइबर फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक संगठित गिरोह वैध आधार सेवा केंद्र की ID हैक कर फर्जी कार्ड बनाने और मौजूदा डेटा में बदलाव करने का धंधा चला रहा था। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह के चार अन्य सदस्य अभी फरार हैं।
जांच में सामने आया है कि आरोपी बहजोई क्षेत्र में एक अस्थायी सेटअप के जरिए पूरा फर्जी आधार केंद्र संचालित कर रहे थे। इस सेटअप में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और प्रक्रिया इतनी व्यवस्थित थी कि यह किसी वैध सेवा केंद्र जैसा ही प्रतीत होता था। आम लोग आधार कार्ड में नाम, पता या मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए यहां पहुंचते थे, लेकिन उन्हें बिना जानकारी के फर्जीवाड़े का हिस्सा बना दिया जाता था।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का तरीका बेहद तकनीकी और संगठित था। आरोपी किसी वैध आधार सेवा केंद्र की लॉगिन ID को हैक कर उसे अपने सिस्टम से जोड़ लेते थे। इसके बाद उसी ID का इस्तेमाल कर नए आधार कार्ड तैयार किए जाते थे और पहले से बने कार्ड में बदलाव किए जाते थे। इस पूरी प्रक्रिया में सरकारी सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच बनाकर डेटा से छेड़छाड़ की जा रही थी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को असदपुर और आसपास के इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। स्थानीय स्तर पर चर्चा थी कि कुछ स्थानों पर बिना अनुमति के आधार कार्ड बनाने और संशोधन का काम किया जा रहा है। इन इनपुट्स के आधार पर पुलिस टीम ने छापेमारी की और मौके से तीन आरोपियों को पकड़ लिया।
छापेमारी के दौरान बरामद उपकरणों ने पूरे नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया। आरोपियों के पास से दो लैपटॉप, फिंगरप्रिंट स्कैनर, प्रिंटर, कई फर्जी मोहरें और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं। इन उपकरणों का उपयोग आधार कार्ड बनाने, डेटा संशोधन करने और ग्राहकों से संपर्क स्थापित करने के लिए किया जा रहा था।
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पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों के लोगों के लिए भी आधार कार्ड तैयार करता था। आरोपी ग्राहकों से तय शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूलते थे और उन्हें जल्दी काम होने का भरोसा देकर फंसाते थे। इस तरह यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और बड़ी संख्या में लोगों के दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर चुका था।
जांच एजेंसियों के लिए सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस मामले में एक वैध आधार केंद्र की ID को हैक किया गया था। इससे साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संबंधित ID किस केंद्र की थी और उसमें किस स्तर पर सुरक्षा चूक हुई।
हालांकि तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन गिरोह के चार अन्य सदस्य अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है और जल्द गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है। इसके साथ ही इस नेटवर्क के अन्य जिलों और राज्यों से जुड़े कनेक्शन की भी जांच की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में “social engineering” और तकनीकी कमजोरियों का संयुक्त रूप से इस्तेमाल किया जाता है। लोगों की जरूरत और जल्द काम कराने की इच्छा का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह उन्हें जाल में फंसाते हैं और फिर उनके पहचान दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करते हैं।
फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे आधार से जुड़े फर्जीवाड़े के एक बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हो सकता है।
