प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा करते हुए एसटीएफ ने बुधवार को ‘सॉल्वर गैंग’ के सरगना समेत नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सीबीएसई की जूनियर सेक्रेटेरियट असिस्टेंट समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में फर्जी तरीके से अभ्यर्थियों को पास कराने का धंधा चला रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों में मनीष मिश्रा (झांसी), राज किशोर, नीरज झा (दिल्ली), राम मिलन, सत्यम कुमार (सहारनपुर), आकाश अग्रवाल, सौरभ सोनी, अभिषेक यादव (जालौन) सहित अन्य शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि गिरोह का मास्टरमाइंड मनीष मिश्रा था, जो पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था।
फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बना ‘एंट्री पास’
जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गिरोह अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। इसके बाद उनके नाम पर फर्जी चिकित्सकीय दिव्यांग प्रमाणपत्र तैयार कराए जाते थे। इन प्रमाणपत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में ‘स्क्राइबर’ (लेखक) की सुविधा मिलती थी।
यहीं से खेल शुरू होता था। गिरोह अपने प्रशिक्षित सॉल्वरों को लेखक बनाकर परीक्षा केंद्र में बैठाता था, जो असली अभ्यर्थी की जगह प्रश्नपत्र हल करते थे। इस तरह बिना परीक्षा दिए ही अभ्यर्थियों को पास कराने की पूरी व्यवस्था तैयार की गई थी।
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कई शहरों में फैला था नेटवर्क
जांच में खुलासा हुआ है कि यह गैंग झांसी, जालौन, बांदा, गोरखपुर, लखनऊ समेत कई जिलों में सक्रिय था। अलग-अलग शहरों में एजेंट और सॉल्वर तैनात किए गए थे, जो अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें इस अवैध नेटवर्क से जोड़ते थे।
सूचना के आधार पर एसटीएफ ने एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार किया। एक आरोपी को गोरखपुर से पकड़ा गया, जबकि बाकी को लखनऊ के विकासनगर स्थित परीक्षा केंद्र से दबोचा गया।
परीक्षा के दौरान ही बिछाया जाल
बताया गया कि सीबीएसई द्वारा एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल भर्ती परीक्षा (टियर-2) के तहत जूनियर सेक्रेटेरियट असिस्टेंट परीक्षा का आयोजन 22 से 25 मार्च के बीच किया गया था। परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई थी, जिसमें एसटीएफ को भी लगाया गया था।
इसी दौरान संदिग्ध गतिविधियों के इनपुट मिलने पर टीम ने सक्रियता दिखाई और पूरे गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया।
भारी मात्रा में सामान और नकदी बरामद
कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से 13 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, ₹2.70 लाख नकद, एक स्विफ्ट डिजायर कार और छह फर्जी पीएफ (दिव्यांग) प्रमाणपत्र बरामद किए गए हैं। बरामद दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि गिरोह लंबे समय से इस तरह की परीक्षाओं में सेंध लगा रहा था।
बेरोजगार युवाओं को बना रहे थे शिकार
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर फंसाता था। अभ्यर्थियों को विश्वास दिलाया जाता था कि उन्हें बिना मेहनत के परीक्षा पास करवा दी जाएगी। इसके एवज में मोटी रकम ली जाती थी, जो अलग-अलग स्तर पर बांटी जाती थी।
जांच का दायरा बढ़ा, और गिरफ्तारियां संभव
प्रारंभिक पूछताछ के बाद जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। आशंका है कि इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान की जा रही है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एसटीएफ की इस कार्रवाई को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
