डिजिटल अरेस्ट स्कैम और ऑनलाइन धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर केंद्र सरकार ने सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं (TSPs) के लिए SIM कार्ड जारी करने में बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली (Biometric Identity Verification System – BIVS) को अनिवार्य करने का फैसला किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम अगले नौ महीनों के भीतर पूरे देश में BIVS का रोलआउट सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह दिशा-निर्देश गृह मंत्रालय की उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) ने जारी किया। समिति ने SIM जारी करने की प्रक्रिया में वास्तविक समय की निगरानी के लिए एक विशेष डैशबोर्ड बनाने और प्रति व्यक्ति SIM की संख्या को नौ तक सीमित रखने पर जोर दिया। साथ ही, किसी व्यक्ति को एक दिन में केवल एक SIM जारी करने का नियम लागू करने की सलाह दी गई। वर्तमान में, TSP केवल अपने नेटवर्क के भीतर SIM लिमिट का ट्रैक रखते हैं और डाटा DoT और License Service Area (LSA) यूनिट्स के साथ समय-समय पर साझा करते हैं।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत संदिग्ध SIM को दो से तीन घंटे के भीतर ब्लॉक करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। BIVS प्रणाली ग्राहक की बायोमेट्रिक जानकारी जैसे फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन के साथ SIM को लिंक करेगी, जिससे धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोकने में मदद मिलेगी।
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विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि डिजिटल अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में लगातार वृद्धि हो रही है। उनका कहना है कि बिना कड़े सत्यापन के SIM जारी करने से साइबर अपराधियों को पहचान छुपाकर ऑनलाइन ठगी करने का अवसर मिलता है। BIVS के माध्यम से वास्तविक समय पहचान जांच से ऐसे अपराधों में कमी आने की संभावना है।
इस पहल के तहत टेलीकॉम कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक SIM ग्राहक की सत्यापित बायोमेट्रिक पहचान से जुड़ा हो। DoT और TSPs के बीच नियमित डेटा साझा करने और नए डैशबोर्ड से निगरानी के माध्यम से प्रणाली को और प्रभावी बनाया जाएगा।
अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि SIM लेने के समय अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करते समय सतर्क रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना संबंधित टेलीकॉम सेवा प्रदाता या अधिकारियों को दें।
सरकार का यह कदम डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस व्यवस्था के माध्यम से SIM ब्लॉकिंग और पहचान सत्यापन में समय की बचत होने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी तेजी से हो सकेगी। आने वाले महीनों में BIVS के देशव्यापी रोलआउट से उम्मीद जताई जा रही है कि डिजिटल अपराध और धोखाधड़ी के मामलों में पर्याप्त कमी आएगी।
