HDFC Bank पर DFSA की कार्रवाई और Credit Suisse बॉन्ड विवाद ने बैंक की गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए।

HDFC बैंक बोर्डरूम विवाद: RBI ने मांगी मीटिंग रिकॉर्डिंग, चेयरमैन इस्तीफे की असली वजह की जांच तेज

Team The420
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HDFC बैंक के अंदरूनी विवाद ने अब सीधे रेगुलेटर का ध्यान खींच लिया है। बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक से 17 और 18 मार्च को हुई बोर्ड मीटिंग्स की पूरी जानकारी मांगी है। इसमें सिर्फ लिखित मिनट्स ही नहीं, बल्कि मीटिंग का ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी शामिल है।

मनीकंट्रोल की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, RBI इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और चाहता है कि बोर्ड मीटिंग्स में किन मुद्दों पर असहमति हुई और क्या चर्चाएं हुईं, इसका पूरा विवरण उसे उपलब्ध कराया जाए। विशेष रूप से RBI यह देखना चाहता है कि चक्रवर्ती ने जो बातें रेगुलेटर को बताई हैं, क्या वे मीटिंग रिकॉर्ड में सही ढंग से दर्ज हैं या नहीं।

सूत्रों के अनुसार, 17 मार्च को हुई नॉमिनेशन और रिम्यूनरेशन कमेटी (NRC) की मीटिंग का विवरण भी RBI ने मांगा है। आमतौर पर कंपनियों को बोर्ड मीटिंग के मिनट्स तैयार करने के लिए 14 दिन का समय दिया जाता है, लेकिन RBI ने केवल एक सप्ताह के भीतर जानकारी देने को कहा है। इससे संकेत मिलता है कि मामला रेगुलेटर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

पूर्व चेयरमैन चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे में साफ लिखा कि पिछले दो साल में बैंक में कुछ ऐसी घटनाएं हुईं, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं। माना जा रहा है कि उनका टकराव बैंक के MD और CEO शशिधर जगदीशन के साथ हुआ था। इसी मतभेद के चलते उन्होंने अपना पद छोड़ने का निर्णय लिया।

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RBI की सक्रियता इस बात की ओर भी इशारा करती है कि वह किसी भी तरह की गड़बड़ी या गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं करना चाहता। चक्रवर्ती ने RBI को संकेत दिया था कि बोर्ड मीटिंग के रिकॉर्ड में उनकी कुछ चिंताएं पूरी तरह से दर्ज नहीं हुईं। यही कारण हो सकता है कि अब रेगुलेटर ने रिकॉर्डिंग और दस्तावेज दोनों मांगे हैं, ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें।

बैंक ने अपने हिस्से से केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए पार्ट-टाइम अंतरिम चेयरमैन नियुक्त किया है। साथ ही, चक्रवर्ती के इस्तीफे की समीक्षा के लिए एक घरेलू और एक विदेशी लॉ फर्म को नियुक्त किया गया है। बैंक का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता और गवर्नेंस सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अब केवल इस्तीफे का मामला नहीं रहा। यह बैंक की कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बोर्ड के भीतर चल रहे मतभेदों पर भी सवाल खड़ा करता है। आने वाले दिनों में RBI की जांच से कई अहम खुलासे हो सकते हैं, जिनका असर बैंक और उसके निवेशकों दोनों पर पड़ेगा।

HDFC बैंक के शेयरों पर भी इस विवाद का असर देखा गया। चक्रवर्ती के इस्तीफे और बोर्डरूम विवाद की खबर आने के बाद बैंक के ADR में गिरावट दर्ज की गई, जबकि निवेशक घटनाक्रम की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, RBI की कार्रवाई यह दर्शाती है कि बैंकिंग गवर्नेंस में किसी भी तरह की अनियमितताओं को रेगुलेटर गंभीरता से ले रहा है। इस मामले की निगरानी और आगामी रिपोर्ट्स बैंक की आंतरिक प्रक्रियाओं और निवेशकों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

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