दक्षिण-पश्चिमी जिले की साइबर थाना पुलिस ने हाल ही में एक बड़े एआई आधारित निवेश घोटाले का पर्दाफाश किया है। जांच में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो केंद्रीय वित्त मंत्री का एआई तकनीक से तैयार किया गया फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर लोगों को निवेश करने के लिए लुभा रहे थे। आरोपियों ने निवेश का लालच देकर कुल 22.67 लाख रुपये की ठगी की। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह कंबोडिया में बैठे अंतरराष्ट्रीय साइबर जालसाजों के लिए काम कर रहा था।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में तजिंद्र सिंह उर्फ लकी (26), आशीष सैनी (24), शिव दयाल सिंह (28), शिवा (18), गिरिराज किशोर (18), रामदेव सांगला (50), प्रवीण कुमावत उर्फ लकी (20), दीपक मेवाड़ा उर्फ देव (35), त्रिलोक चंद नायक (32), प्रतिभा उर्फ पायल (25) और सतीश (34) शामिल हैं। इनके पास से 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक/चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, लैपटॉप, 6 यूपीआई स्कैनर, प्रिंटर, नकली दस्तावेज और अन्य डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं। पुलिस पूरी तरह इस नेटवर्क का विश्लेषण कर रही है।
एक 60 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वित्त मंत्री का एक वीडियो देखा। वीडियो में उन्हें एक ऐप के जरिए निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। शुरुआत में थोड़ी आय दिखाकर भरोसा दिलाया गया, लेकिन बाद में आरोपियों ने संपर्क बंद कर दिया। इस प्रक्रिया में पीड़ित से कुल ₹22.67 लाख की ठगी हुई।
एआई तकनीक का दुरुपयोग: पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वित्त मंत्री का वीडियो तैयार किया, जिसमें ऐसा प्रतीत होता था कि मंत्री विशेष ऐप के जरिए लोगों को निवेश करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इस वीडियो को फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल किया गया, जिससे लोग आसानी से उनके जाल में फंस गए।
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फर्जी कॉल सेंटर और म्यूल खाते: पुलिस ने तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मनी ट्रेल के आधार पर रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस में फर्जी कॉल सेंटर का पता लगाया। इस सेंटर से म्यूल बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर की जाती थी। पुलिस ने छापेमारी कर तजिंद्र सिंह, आशीष सैनी, शिव दयाल सिंह, शिवा और गिरिराज किशोर को मौके से गिरफ्तार किया। आगे की जांच में पता चला कि बैकएंड ऑफिस रोहिणी के दीप विहार में चल रहा था और नेटवर्क मुंबई और राजस्थान तक फैला हुआ था। राजस्थान से चार आरोपियों – रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत, दीपक मेवाड़ा और त्रिलोक चंद नायक को गिरफ्तार किया गया। दो अन्य आरोपियों – प्रतिभा उर्फ पायल और सतीश को दिल्ली से पकड़ा गया।
आरोपियों ने बताया कि वे म्यूल खातों का प्रबंधन कर रहे थे और उन्हें मुंबई में बैठे एक व्यक्ति पीके को सौंप देते थे। खाते की जानकारी व्हाट्सएप और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से साझा की जाती थी। यह पूरा नेटवर्क कंबोडिया में बैठे अंतरराष्ट्रीय साइबर जालसाजों के लिए काम कर रहा था, जो भारतीय नागरिकों को निवेश का लालच देकर ठगी का शिकार बना रहे थे।
पुलिस अब पूरे गिरोह के डिजिटल नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने में लगी है कि अन्य पीड़ितों से हुई ठगी की रकम भी इसी नेटवर्क के माध्यम से जुटाई गई थी। साइबर थाना के अनुसार, इस प्रकार के एआई और डिजिटल तकनीक का दुरुपयोग लगातार बढ़ रहा है, और आम लोगों को ऐसे निवेश झांसे से सतर्क रहने की जरूरत है।
विशेषज्ञ की राय: साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और लोग बिना जांच-पड़ताल किसी भी वीडियो या लिंक पर भरोसा न करें।
