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‘अमेरिकी हेल्थ सेक्टर फिर निशाने पर’: ईरान से जुड़े हैकर्स का दूसरा साइबर हमला, रैनसमवेयर से मेडिकल संस्थान को किया लॉक

Roopa
By Roopa
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वॉशिंगटन। अमेरिका के हेल्थकेयर सेक्टर पर साइबर हमलों का खतरा एक बार फिर गहरा गया है। हालिया खुलासे में सामने आया है कि ईरान से जुड़े हैकर ग्रुप ने फरवरी के अंत में एक अमेरिकी मेडिकल संस्थान पर रैनसमवेयर हमला किया। यह इस साल अमेरिका-ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के दौरान हेल्थ सेक्टर पर दूसरा बड़ा साइबर अटैक माना जा रहा है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के पीछे Pay2Key नाम का रैनसमवेयर गैंग सक्रिय था, जो 2020 से लगातार साइबर हमलों में शामिल रहा है। हमलावरों ने सबसे पहले संस्थान के एक एडमिनिस्ट्रेटर अकाउंट को हैक कर नेटवर्क में एंट्री हासिल की। इसके बाद वे कई दिनों तक सिस्टम के भीतर छिपे रहे और गतिविधियों पर नजर रखते रहे, जिससे उनके हमले की तैयारी और भी खतरनाक हो गई।

जांच में सामने आया कि हमलावरों ने सही समय का इंतजार करने के बाद अचानक मालवेयर डिप्लॉय किया, जिसने महज तीन घंटे के भीतर पूरे आईटी सिस्टम को एन्क्रिप्ट कर दिया। इससे अस्पताल की डिजिटल सेवाएं ठप हो गईं और संचालन पर सीधा असर पड़ा। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हमले में किसी भी तरह का डेटा बाहर नहीं भेजा गया और न ही हैकर्स ने फिरौती की कोई मांग की।

इस घटना के बाद साइबर सिक्योरिटी टीमों ने तुरंत कार्रवाई की। घटना के दौरान सुरक्षा प्रतिक्रिया टीमों ने सिस्टम को कंट्रोल करने और हमले के प्रभाव को सीमित करने का प्रयास किया। बाद में विशेषज्ञों को बुलाकर मालवेयर के व्यवहार और हमले की रणनीति का विस्तृत विश्लेषण किया गया।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान सरकार अपने साइबर नेटवर्क और प्रॉक्सी हैकर समूहों का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के जवाब में कर रही है। हाल के महीनों में यह रणनीति अधिक आक्रामक रूप में सामने आई है, जिसमें क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थ सेक्टर को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है।

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पिछले सप्ताह भी अमेरिकी एजेंसियों ने खुलासा किया था कि ईरान से जुड़े हैकर्स ने एक मेडिकल डिवाइस कंपनी को टारगेट किया था। इसके अलावा चेतावनी दी गई थी कि ऐसे हैकर ग्रुप्स टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए मालवेयर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें पत्रकारों, एक्टिविस्ट्स और विरोधी समूहों को निशाना बनाया जा रहा है।

साइबर सुरक्षा के जानकारों का कहना है कि हेल्थकेयर सेक्टर हैकर्स के लिए आसान लक्ष्य बनता जा रहा है, क्योंकि यहां संवेदनशील डेटा के साथ-साथ तत्काल सेवाओं का दबाव भी होता है। ऐसे में रैनसमवेयर हमले का असर सीधे मरीजों की सेवाओं पर पड़ सकता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

इस पूरे घटनाक्रम पर एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता का कहना है, “रैनसमवेयर हमले अब केवल पैसे उगाही तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये भू-राजनीतिक दबाव बनाने का हथियार बन चुके हैं। हेल्थ सेक्टर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को निशाना बनाकर हमलावर ज्यादा प्रभाव पैदा करना चाहते हैं।”

आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत और तनाव कम करने के प्रयासों के बीच साइबर हमलों की यह श्रृंखला एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहेगी, तब तक साइबर स्पेस में इस तरह के हमलों का खतरा भी बना रहेगा।

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