ऑनलाइन भर्ती में बढ़ता खतरा; ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सहारे रच रहे भरोसेमंद जाल, विशेषज्ञों ने दी सख्त चेतावनी

‘UPTET के नाम पर डिजिटल जाल’: फर्जी वेबसाइट से अभ्यर्थियों को फंसाने की कोशिश, आयोग ने जारी किया अलर्ट

Roopa
By Roopa
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प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET)-2026 को लेकर जहां एक ओर बढ़े हुए आवेदन शुल्क पर विवाद गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी ओर फर्जी वेबसाइट के जरिए अभ्यर्थियों को ठगने की साजिश सामने आई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने इस मामले में स्पष्ट चेतावनी जारी करते हुए अभ्यर्थियों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही आवेदन किया जाए।

आयोग के अनुसार, 20 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के बाद परीक्षा से जुड़ी सभी जानकारी और निर्देश पुस्तिका अधिकृत वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। इसके बावजूद ‘uptet2026.in’ नाम से एक फर्जी वेबसाइट तैयार की गई है, जो हूबहू असली पोर्टल की तरह दिखती है। इस साइट पर आवेदन से जुड़े विकल्प भी दिए गए हैं, जिससे अभ्यर्थियों को भ्रमित कर उनके साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ गई है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह वेबसाइट पूरी तरह भ्रामक है और इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को गुमराह कर आर्थिक नुकसान पहुंचाना हो सकता है। मामले में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और संबंधित एजेंसियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं।

इधर, यूपीटीईटी-2026 के आवेदन शुल्क को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। युवा मंच ने इस मुद्दे पर आयोग को ज्ञापन सौंपते हुए शुल्क में कटौती और प्रश्नपत्रों को त्रुटिरहित बनाने की मांग उठाई है।

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युवा मंच के संयोजक अनिल सिंह ने कहा कि परीक्षा के लिए ₹1000 शुल्क निर्धारित किया गया है। ऐसे में जो अभ्यर्थी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तर के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उन्हें ₹2000 तक का भुगतान करना पड़ रहा है। यह पहले से ही बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ है।

ज्ञापन के दौरान राहुल पांडेय और ज्ञान प्रकाश सिंह सहित अन्य अभ्यर्थियों ने भी परीक्षा प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की। उनका कहना है कि शुल्क बढ़ाने के साथ-साथ परीक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी आयोग की जिम्मेदारी है, ताकि अभ्यर्थियों का भरोसा बना रहे।

साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के समय इस तरह की फर्जी वेबसाइटों की संख्या अचानक बढ़ जाती है। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह कहते हैं, “साइबर अपराधी अक्सर सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेते हैं। वे ऐसी वेबसाइट तैयार करते हैं जो बिल्कुल असली जैसी दिखती हैं, ताकि अभ्यर्थी बिना जांच-पड़ताल के अपनी निजी जानकारी और शुल्क साझा कर दें।”

उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले वेबसाइट के URL को ध्यान से जांचना बेहद जरूरी है। साथ ही, केवल सरकारी या अधिकृत स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए।

आयोग ने भी अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान वेबसाइट, लिंक या सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आवेदन करने से बचें। यदि कोई संदिग्ध वेबसाइट या गतिविधि दिखाई देती है, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

फिलहाल, यूपीटीईटी-2026 को लेकर जहां एक ओर तैयारी का माहौल है, वहीं दूसरी ओर शुल्क विवाद और साइबर ठगी का खतरा अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा रहा है। ऐसे में सतर्कता और आधिकारिक निर्देशों का पालन ही सुरक्षित विकल्प माना जा रहा है।

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