गुरुग्राम में SIM बॉक्स के जरिए चल रहे इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा, कंबोडिया-फिलीपींस कनेक्शन की जांच तेज

SIM बॉक्स से चल रहा था इंटरनेशनल साइबर रैकेट’: गुरुग्राम में बड़ा खुलासा, फिलीपींस कनेक्शन उजागर

Team The420
5 Min Read

गुरुग्राम। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का गुरुग्राम में खुलासा हुआ है, जिसमें अवैध सिम बॉक्स तकनीक के जरिए कॉल रूटिंग कर देशभर में साइबर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा था। जांच में सामने आया है कि यह पूरा रैकेट फिलीपींस से संचालित हो रहा था और भारत में स्थानीय नेटवर्क के जरिए इसे चलाया जा रहा था। इस मामले में राहुल कुमार नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जो इस नेटवर्क में तकनीकी उपकरणों की सप्लाई और संचालन में अहम भूमिका निभा रहा था।

मामले का खुलासा तब हुआ जब गुरुग्राम के दो मकान मालिकों ने अपने किरायेदारों की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर की गई छापेमारी में किराए के मकानों से अवैध सिम बॉक्स (GSM गेटवे) बरामद किए गए। ये उपकरण आमतौर पर कॉल के वास्तविक स्रोत को छिपाने और टेलीकॉम निगरानी को दरकिनार करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

17 मार्च को दर्ज दो अलग-अलग मामलों के बाद की गई कार्रवाई में बड़ी मात्रा में तकनीकी उपकरण जब्त किए गए। बरामद सामान में पांच सिम बॉक्स (प्रत्येक में 32 सिम पोर्ट एंटेना), आठ राउटर, 18 बैटरियां, तीन यूपीएस (इन्वर्टर) और विभिन्न टेलीकॉम कंपनियों के कुल 504 सिम कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया, जिसका इस्तेमाल इस नेटवर्क को संचालित करने में किया जा रहा था।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

जांच में यह भी सामने आया है कि यह रैकेट एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के तहत काम कर रहा था। सिम बॉक्स और अन्य उपकरण फिलीपींस से नेपाल भेजे जाते थे और वहां से बिहार के रास्ते भारत में लाए जाते थे। इसके बाद इन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों, खासकर गुरुग्राम जैसे शहरों में पहुंचाया जाता था, जहां किराए के मकानों को ऑपरेशन बेस बनाया गया था।

गिरफ्तार आरोपी राहुल कुमार की भूमिका इस नेटवर्क में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह नोएडा में रहकर इन उपकरणों को रिसीव करता था और उन्हें अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाने का काम करता था। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वह फिलीपींस में बैठे एक व्यक्ति के लगातार संपर्क में था, जो उसे वीडियो कॉल के जरिए सिम बॉक्स इंस्टॉल करने और संचालित करने के निर्देश देता था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूरा ऑपरेशन रिमोट कंट्रोल तरीके से संचालित किया जा रहा था।

आरोपी ने यह भी स्वीकार किया है कि उसने गुरुग्राम में उपकरणों की डिलीवरी की थी और इसके बदले उसे करीब ₹15,000 का भुगतान किया गया था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह भुगतान विदेशी नेटवर्क से जुड़ा हुआ है, जो इस रैकेट के अंतरराष्ट्रीय पहलू को और मजबूत करता है।

सिम बॉक्स तकनीक के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को लोकल कॉल्स में बदल दिया जाता है, जिससे कॉल की असली लोकेशन का पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसी तकनीक का इस्तेमाल साइबर अपराधी फिशिंग कॉल, OTP फ्रॉड और पहचान बदलकर ठगी जैसे मामलों में करते हैं। इससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क तकनीक और संगठित अपराध का खतरनाक मेल हैं। प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, ऐसे गिरोह सोशल इंजीनियरिंग और तकनीकी हेरफेर का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं, जिससे इनकी पहचान करना और रोकना और भी कठिन हो जाता है।

फिलहाल, इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि देश के किन-किन हिस्सों में इस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया और कितने लोगों को निशाना बनाया गया।

यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि साइबर अपराध अब सीमाओं से परे जाकर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ तकनीकी निगरानी को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है।

जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो इस अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट की गहराई और विस्तार को सामने ला सकते हैं।

 

हमसे जुड़ें

Share This Article