₹100 करोड़ के PNB लोन फ्रॉड मामले में 11 आरोपियों को जमानत मिलने के बाद केस से जुड़े दस्तावेजों और अदालत की कार्यवाही का प्रतीकात्मक दृश्य।

PNB के पूर्व क्लर्क ने ₹13,700 करोड़ के निरव मोदी घोटाले में खुद को निर्दोष ठहराने की याचिका दायर

Team The420
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मुंबई। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के पूर्व क्लर्क मनोज हनुमंत खरात ने मुंबई की विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अदालत में ₹13,700 करोड़ के निरव मोदी घोटाले में अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों से खुद को बरी करने की याचिका दायर की है। अदालत इस याचिका पर 13 अप्रैल को सुनवाई करेगी।

याचिका में खरात ने तर्क दिया है कि उनके खिलाफ मौजूद सबूत, चाहे उन्हें सही मान भी लिया जाए, यह साबित नहीं करते कि उन्होंने किसी आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार में भाग लिया। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी भूमिका केवल बैंक में सिंगल विंडो ऑपरेटर के रूप में थी, जिसमें उनका कार्य सीमित था—SWIFT मैसेज टाइप करना, जो बैंक लेन‑देन की सुरक्षा के लिए उपयोग किए जाते हैं।

याचिका में बताया गया है कि इन मैसेजों को तैयार करने के निर्देश उनके वरिष्ठ और तत्कालीन डिप्टी मैनेजर गोकुलनाथ शेट्टी द्वारा दिए जाते थे। शेट्टी ही इन लेन‑देन की जांच, अनुमोदन और बैंक के कोर सिस्टम में एंट्री करने के लिए जिम्मेदार थे। खरात ने अदालत में कहा कि उनके पास किसी भी लोन को मंजूरी देने या बैंक गारंटी जारी करने का अधिकार नहीं था और उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि LoU बिना अनुमोदन, आवश्यक जमा या सिस्टम में एंट्री किए जारी किए गए।

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याचिका में यह भी दावा किया गया कि खरात ने घोटाले से किसी प्रकार का लाभ नहीं उठाया। उनका कहना है कि जबकि उनके कर्तव्यों में कुछ चूक हो सकती है, लेकिन अपराधी मंशा के बिना उन्हें दोषी ठहराना सही नहीं होगा।

यह मामला जनवरी 2018 में PNB द्वारा दर्ज शिकायत पर आधारित है। बैंक ने आरोप लगाया था कि उसके कुछ अधिकारियों ने निरव मोदी और उनके चचेरे भाई मेहुल चोकसी से जुड़ी फर्मों के साथ मिलकर LoU जारी किए थे, बिना आवश्यक प्रक्रिया का पालन किए। ये LoU SWIFT मैसेजिंग सिस्टम के जरिए भेजे गए, लेकिन बैंक के आंतरिक सिस्टम में दर्ज नहीं किए गए। इसके चलते विदेशी शाखाओं ने लोन जारी किए जो बाद में अनपेड रहे, जिससे PNB को भारी नुकसान हुआ।

जांचकर्ताओं के अनुसार यह धोखाधड़ी केवल कुछ लेन‑देन तक सीमित नहीं थी, बल्कि कई वर्षों तक चली। 2011 से 2017 के बीच 1,200 से अधिक LoU कथित रूप से बिना उचित सुरक्षा उपायों के जारी किए गए, जिससे बैंक प्रक्रियाओं में गंभीर चूक स्पष्ट होती है।

खरात की याचिका पिछले वर्ष इसी मामले में विशेष CBI अदालत द्वारा PNB के एक पूर्व कार्यकारी निदेशक को बरी करने के आदेश के बाद आई है। अदालत ने तब कहा था कि केवल लापरवाही या प्रशासनिक चूक को अपराध नहीं माना जा सकता जब तक कि अपराधी मंशा या सक्रिय भागीदारी सिद्ध न हो।

याचिका में खरात ने यह तर्क भी रखा है कि इस चरण पर अदालत को यह देखना चाहिए कि उनके खिलाफ मजबूत संदेह है या नहीं, केवल बैंक में उनकी भूमिका के आधार पर दोष तय करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि केवल क्लर्क स्तर के कर्मचारियों को अपराधी ठहराना, बिना मंशा के प्रमाण के, लापरवाही और अपराध की सीमा को धुंधला कर देगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला बैंकिंग प्रणाली में नियंत्रण की कमी और उच्च पदस्थ अधिकारियों की भूमिका के बिना निचले स्तर के कर्मचारियों पर गलत आरोपों के दुरुपयोग का उदाहरण भी पेश करता है।

 

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