अमेरिकी बुजुर्गों से ठगी के आरोप; कोर्ट बोला—सिर्फ संदेह के आधार पर खातों पर रोक नहीं, कारोबार के अधिकार का भी संरक्षण जरूरी

‘₹330 करोड़ के इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड केस में राहत’: दिल्ली कोर्ट ने आरोपी के बैंक खाते डीफ्रीज करने का दिया आदेश

Roopa
By Roopa
4 Min Read

नई दिल्ली। Delhi की एक अदालत ने ₹330 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड मामले में बड़ा आदेश देते हुए आरोपी से जुड़े बैंक खातों को डीफ्रीज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि केवल संदेह या अप्रमाणित बैंक एंट्री के आधार पर खातों को लंबे समय तक फ्रीज रखना उचित नहीं ठहराया जा सकता।

यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिसमें अमेरिकी बुजुर्ग नागरिकों को कथित तौर पर डिजिटल माध्यम से ठगकर करीब ₹330 करोड़ (लगभग 40 मिलियन डॉलर) की रकम हड़पी गई। जांच एजेंसियों ने इस सिलसिले में आरोपी के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया था, जिसके खिलाफ आरोपी ने अदालत का रुख किया।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि जांच को सुरक्षित रखना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही आरोपी के व्यापार और वित्तीय गतिविधियों को मनमाने ढंग से बाधित नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, कानून संतुलन की मांग करता है—एक तरफ पीड़ितों के हितों की रक्षा होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ आरोपी के अधिकारों का भी सम्मान जरूरी है।

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि बैंक खातों के फ्रीज होने से उसका कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है और वह अपनी सामान्य वित्तीय गतिविधियां नहीं चला पा रहा है। इस पर अदालत ने कहा कि यदि यह आशंका है कि आरोपी पैसे निकाल सकता है या रकम को इधर-उधर कर सकता है, तो इसे उचित शर्तों के जरिए नियंत्रित किया जा सकता है, न कि सीधे खातों को अनिश्चितकाल तक फ्रीज करके।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सिर्फ आशंका या अनुमान के आधार पर कठोर कदम उठाना न्यायसंगत नहीं है। यदि जांच एजेंसियों के पास ठोस साक्ष्य हैं, तो वे कानून के तहत उचित कार्रवाई कर सकती हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति के व्यवसायिक अधिकारों को बिना पर्याप्त आधार के बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

FutureCrime Summit 2026 Calls for Speakers From Government, Industry and Academia

इस मामले में यह भी सामने आया कि बैंक खातों को फ्रीज करने की जानकारी आरोपी और अदालत को जांच एजेंसी की ओर से दाखिल एक जवाब के जरिए मिली थी। इस पर अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि ऐसी कार्रवाई में पारदर्शिता और प्रक्रिया का पालन बेहद जरूरी है।

साइबर फ्रॉड के इस कथित नेटवर्क की जांच अभी जारी है और इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। माना जा रहा है कि इस तरह के मामलों में फर्जी कॉल सेंटर, टेक सपोर्ट स्कैम और डिजिटल धोखाधड़ी के अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जाता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जहां पीड़ितों को विश्वास में लेकर उनसे संवेदनशील जानकारी या सीधे पैसे ट्रांसफर कराए जाते हैं। यही वजह है कि जांच एजेंसियां वित्तीय ट्रेल को ट्रैक करने के लिए बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड्स पर विशेष ध्यान देती हैं।

हालांकि, अदालत के इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जांच के नाम पर किसी भी व्यक्ति के अधिकारों का अतिक्रमण नहीं किया जा सकता। अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाए रखना ही कानून की मूल भावना है।

इस आदेश के साथ ही यह संदेश भी गया है कि साइबर अपराधों के खिलाफ सख्ती जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही कानूनी प्रक्रिया का पालन और व्यक्तिगत अधिकारों का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

हमसे जुड़ें

Share This Article