हिसार। आयुष्मान भारत योजना के तहत वित्तीय धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जब हिसार के उकलाना में स्थित विधाता नर्सिंग होम पर ₹48,000 का फर्जी दावा करने के आरोप में मुख्यमंत्री फ्लाइंग स्क्वॉड ने छापेमारी की। अस्पताल ने नवजात शिशु को केवल कागजों पर दाखिल दिखाकर सरकारी राशि हड़पने का प्रयास किया।
जानकारी के अनुसार, शिकायत पर मुख्यमंत्री फ्लाइंग स्क्वॉड और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने अस्पताल में छापा मारा। छापेमारी के दौरान रिकॉर्ड में कई अनियमितताएं पाई गईं, जो शिकायतकर्ता संदीप कुमार के आरोपों की पुष्टि करती हैं।
शिकायतकर्ता संदीप कुमार, बिटमारा गांव के निवासी, ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी सोनिया को 3 मार्च को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। सामान्य प्रसव के बाद दोनों को 7 मार्च को छुट्टी दे दी गई। संदीप ने अस्पताल में ₹25,000 का इलाज खर्च किया, क्योंकि अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत क्लेम करने से मना कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल ने उनका आयुष्मान और आधार कार्ड अपने पास रख लिया।
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संदीप ने आगे बताया कि 14 मार्च को फॉलो-अप के लिए जब वह अस्पताल गए, तो डॉक्टर ने कहा कि नवजात को अगले दिन लाना होगा। चूंकि बच्चा स्वस्थ था, उन्होंने बच्चे को नहीं लाया। इसके बाद अस्पताल की स्टाफ द्वारा लगातार कॉल करके उन्हें बच्चे को लाने के लिए दबाव डाला गया। 15 मार्च को जब संदीप पुनः अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनका नवजात 7 मार्च से ही भर्ती है।
संदीप ने सामान्य सेवा केंद्र (सीएससी) पर जाकर इस विवरण की जांच की। यहां आयुष्मान पोर्टल पर पाया गया कि अस्पताल ने नवजात को दाखिल दिखाकर ₹48,000 का दावा किया। इस खुलासे के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री फ्लाइंग स्क्वॉड से संपर्क किया।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई अनियमितताएं पाई, जो शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि करती हैं। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री फ्लाइंग स्क्वॉड हिसार रेंज इंचार्ज सुनीना ने कहा, “आयुष्मान योजना का उद्देश्य जरूरतमंदों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, लेकिन ऐसे धोखाधड़ी के मामले न केवल सरकार को वित्तीय नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि पात्र लाभार्थियों के अधिकारों को भी छीनते हैं।”
सुनीना ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कर दी गई है। उन्होंने सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को चेतावनी दी कि योजना का गलत उपयोग करने वाले किसी भी संस्था या व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयुष्मान योजना जैसी सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में इस प्रकार की धोखाधड़ी का प्रभाव व्यापक हो सकता है। केवल एक अस्पताल में नकली दाखिला दिखाने से ही सरकार को लाखों रुपए का नुकसान हो सकता है, जबकि वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक नहीं मिल पाता।
छोटे और निजी अस्पतालों में निगरानी की कमी और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया में लापरवाही ऐसे मामलों को बढ़ावा देती है। यह मामला स्पष्ट करता है कि डिजिटल पोर्टल और सरकारी रिकॉर्ड सिस्टम के बावजूद, नियमित ऑडिट और समय-समय पर छापेमारी अत्यंत आवश्यक है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना के बाद सभी निजी अस्पतालों को नियमों का पालन करने और क्लेम प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, नागरिकों को भी योजना के दुरुपयोग की सूचना देने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
इस खुलासे ने हिसार और आसपास के क्षेत्रों में आयुष्मान योजना के प्रशासनिक ढांचे में सुधार और निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
