चंडीगढ़ और हरियाणा में करोड़ों के फंड डायवर्जन मामले में गठित SIT अब IDFC First Bank से जुड़े लेनदेन, शेल कंपनियों और आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।

चंडीगढ़ और हरियाणा में करोड़ों के फंड डायवर्जन का मामला: SIT करेगी गहन जांच

Team The420
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चंडीगढ़। राजधानी चंडीगढ़ और हरियाणा में सरकारी खातों से करोड़ों रुपये के कथित डायवर्जन के मामले में पुलिस ने 8 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। SIT का उद्देश्य IDFC First Bank से जुड़े मामलों की व्यापक और गहन जांच करना है, ताकि फंड डायवर्जन का पूरा ट्रेल उजागर किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, मामला तब उजागर हुआ जब चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) ने वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि सरकारी खातों में जमा लगभग ₹116.84 करोड़ के फिक्स्ड डिपॉजिट्स के साथ संदिग्ध लेन-देन हुआ है। इसके बाद UT पुलिस ने मामले की जांच के लिए SIT गठित किया।

SIT की जिम्मेदारी में बैंकिंग लेन-देन की समीक्षा, आरोपियों की भूमिका की पहचान और डायवर्ट किए गए फंड का अंतिम उपयोग ट्रेस करना शामिल है। इसमें रियल एस्टेट और अन्य संपत्तियों में निवेश की जानकारी जुटाना भी शामिल है। पुलिस ने बताया कि कथित संलिप्त पूर्व बैंक कर्मचारियों की कस्टडी रिमांड की मांग सोमवार को की जाएगी, ताकि जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

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आरोपियों में IDFC First Bank के पूर्व कर्मचारी शामिल हैं, जिन पर कथित रूप से फंड डायवर्जन में सहायता करने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने कई शेल कंपनियों और लेयर्ड ट्रांजैक्शंस के माध्यम से सरकारी फंड को डायवर्ट किया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ धनराशि सीधे आरोपियों और उनके परिवार के खातों में ट्रांसफर की गई।

पूर्व बैंक कर्मचारी रिभव ऋषि और अभय कुमार पर मुख्य रूप से नजर रखी जा रही है। ऋषि ने जून 2025 में बैंक से इस्तीफा दिया था। उनके कथित कार्यों में शेल कंपनियों के माध्यम से सरकारी फंड को डायवर्ट करना शामिल है। कुछ फंड उनके और उनकी पत्नी दिव्या अरोड़ा के खातों में भी गए।

जांच अधिकारी पूरे फंड ट्रेल का खुलासा करना चाहते हैं, जिसमें निजी कंपनियों और आरोपियों से जुड़े खातों के माध्यम से किए गए सभी लेन-देन शामिल हैं। SIT वित्तीय विशेषज्ञों और फॉरेंसिक टीमों के साथ मिलकर बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर रही है।

पुलिस ने बताया कि SIT को व्यापक जांच का कार्य सौंपा गया है ताकि हर स्तर पर फंड डायवर्जन का खुलासा हो। इसमें सरकारी खातों के ट्रांजैक्शंस का रिव्यू, आरोपियों की भूमिका की पुष्टि और फंड के अंतिम गंतव्य की पहचान शामिल है।

जांच के दौरान SIT संभावित फर्जी दस्तावेज़ों और लेन-देन की परतों को भी उजागर करेगी। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में कस्टडी रिमांड प्राप्त करना आवश्यक है ताकि आरोपियों से आवश्यक पूछताछ की जा सके और पूरे फंड ट्रेल को ट्रैक किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के घोटाले वित्तीय सिस्टम और सरकारी परियोजनाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं। समय पर और सटीक जांच के बिना बड़े पैमाने पर फंड का दुरुपयोग होने की संभावना बनी रहती है।

चंडीगढ़ और हरियाणा में SIT की कार्रवाई यह स्पष्ट संदेश देती है कि प्रशासन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में तेजी और पारदर्शिता के साथ कदम उठा रहा है। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

 

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