उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने ISI समर्थित जासूसी नेटवर्क का खुलासा करते हुए गिरफ्तारियों के साथ सेना की निगरानी में इस्तेमाल सोलर CCTV कैमरे बरामद किए।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने ISI जासूसी रैकेट पकड़ा: नौ गिरफ्तार, पांच नाबालिग हिरासत में

Team The420
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गाजियाबाद/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) द्वारा संचालित कथित जासूसी नेटवर्क को भंग किया। इस अभियान में नौ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और पांच नाबालिगों को हिरासत में लिया गया। लंबे समय से चल रही जांच और यूपी-बिहार में लगातार छापों के बाद यह नेटवर्क सामने आया, जो भारत के प्रमुख सैन्य प्रतिष्ठानों पर निगरानी कर रहा था।

अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार चार वयस्क हैं—गणेश गिरी (20, नेपाली मूल), विवेक राय (18, पूर्णिया, बिहार), गगन प्रजापति (22, मेरठ) और दुर्गेश निषाद (26, जौनपुर/नवी मुंबई)। इसके अलावा, पांच नाबालिग (15-17 वर्ष) उत्तर प्रदेश और बिहार से हिरासत में लिए गए हैं। इस तरह कुल 15 लोग हिरासत में हैं। इससे पहले छह अन्य, जिनमें मास्टरमाइंड सुहैल मलिक और ईरम उर्फ़ मेहक शामिल हैं, को गिरफ्तार किया गया था और पूछताछ जारी है।

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जांच में सामने आया कि ISI नेटवर्क ने दिल्ली कैंट, सोनीपत रेलवे स्टेशन और पुणे रेलवे स्टेशन सहित संवेदनशील स्थानों पर छिपे हुए सोलर-पावर्ड CCTV कैमरे लगाए थे। ये कैमरे SIM-सक्षम थे और लाइव फीड सीधे पाकिस्तान के हैंडलरों तक पहुंचाते थे। छापों में कम से कम दो ऐसे कैमरे, कई मोबाइल फोन, SIM कार्ड और दस्तावेज बरामद हुए। इनमें से एक कैमरा 18 दिन तक लाइव फीड ट्रांसमिट कर रहा था, जिससे भारतीय सेना की गतिविधियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

विशेष जांच दल (SIT) ने खुलासा किया कि इस नेटवर्क ने पूरे भारत में 50 से अधिक ऐसे कैमरे लगाने की योजना बनाई थी। हैंडलरों ने व्हाट्सएप के जरिए कार्यकर्ताओं को ₹500 से ₹15,000 तक का भुगतान किया। संदिग्धों ने स्थानीय युवाओं, जिसमें हिंदू निवासी शामिल थे, को नियुक्त किया ताकि वे सामान्य गतिविधियों में घुल-मिल कर काम कर सकें और जांच एजेंसियों का ध्यान न आकर्षित हो।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों—सुहैल मलिक, ईरम उर्फ़ मेहक, प्रवीण, राज वाल्मीकि, शिवा वाल्मीकि और रितिक गंगवार—ने कथित तौर पर सैन्य ठिकानों और रेलवे स्टेशनों की तस्वीरें, वीडियो और सटीक स्थान विदेश में संपर्कों को भेजे। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा को सीधे खतरा पैदा हुआ, क्योंकि महत्वपूर्ण रक्षा ढांचे की निगरानी लगातार होती रही।

सुरक्षा एजेंसियों ने यूपी पुलिस और अन्य राज्य पुलिस बलों के सहयोग से पूरे नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। यह ऑपरेशन दिखाता है कि विदेशी खुफिया एजेंसियां तकनीक, स्थानीय भर्ती और सोशल मीडिया के जरिए भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की नई रणनीतियों का उपयोग कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि ISI अक्सर संभावित कैडेटों को बिना सत्यापित सोशल मीडिया पोस्ट और फ्रेंड रिक्वेस्ट के माध्यम से गुमराह करती है।

युवा और नाबालिगों का इस नेटवर्क में शामिल होना यह दर्शाता है कि यह कम लागत वाली लेकिन प्रभावी जासूसी योजना थी, जिसमें तकनीकी HUMINT और छिपी निगरानी शामिल थी। भारतीय एजेंसियां, जैसे IB और NIA, डिजिटल फॉरेंसिक्स, SIM ट्रेसिंग, छापे और आवश्यक होने पर आधिकारिक रहस्य अधिनियम के तहत अभियोजन के जरिए इन खतरों का मुकाबला करती हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि यह ऑपरेशन भारतीय कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों की तत्परता और क्षमता को दर्शाता है, जो समय रहते विदेशी जासूसी गतिविधियों को पहचान, निरस्त और समाप्त करने में सक्षम हैं|

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