फर्जी जॉब ऑफर और यूनिवर्सिटी के नाम का दुरुपयोग कर H-1B वीज़ा हासिल करने वाले भारतीय मूल के दो आरोपी अमेरिकी मामले में दोषी ठहरे

फर्जी सरकारी जॉब्स में फंसे हजारों: बेंगलुरु जोड़े ने ठगे ₹25 करोड़

Roopa
By Roopa
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बेंगलुरु। राजधानी बेंगलुरु में एक दंपती को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर कथित तौर पर सैकड़ों बेरोज़गारों और नौकरी चाहने वालों को सरकारी कोर्ट जॉब्स का झांसा देकर लगभग ₹25 करोड़ ठगने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जेसन डी’सूज़ा और लवीना के रूप में की गई है। यह मामला राज्य में बेरोज़गारों और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बीच बढ़ती नौकरी धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करता है।

जांच में सामने आया कि आरोपी हर शिकार से ₹10 लाख से ₹25 लाख तक वसूलते थे। जॉब मिलने का भरोसा दिलाने के लिए उन्होंने जजों के हस्ताक्षर फर्जी बनाकर काउंटरफिट नियुक्ति आदेश जारी किए। जब पीड़ित नियुक्ति की स्थिति पूछने के लिए संपर्क करते, तो आरोपी बहाने बनाकर जवाब देने में विलंब करते और अंततः कॉल का जवाब देना बंद कर देते।

जांच के दौरान यह भी पता चला कि आरोपियों को पहले 2024 में इसी तरह के जॉब फ्रॉड मामले में गिरफ्तार किया गया था। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने कथित तौर पर अपनी अवैध गतिविधियाँ फिर से शुरू कर दी थीं।

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने इस धोखाधड़ी को व्यापक बनाने के लिए एक एजेंट नेटवर्क तैयार किया था। एजेंट संभावित पीड़ितों की पहचान करते, उन्हें भुगतान के लिए मनाते, अपनी कमीशन राशि रखते और बाकी पैसे दंपती को सौंपते। कुछ मामलों में शिकारों को निजी होटलों में बुलाकर दस्तावेज़ों का सत्यापन दिखाने का झांसा दिया गया और फर्जी जॉब ऑफर लेटर दिखाए गए।

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जब पीड़ितों को वास्तविकता का पता चला, तो कई ने सीधे सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अतिरिक्त मामले बेंगलुरु के पुलिस थाने में भी दर्ज किए गए। वर्तमान में, CCB आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि पूरी धोखाधड़ी की सीमा, अन्य पीड़ितों की पहचान और नेटवर्क में शामिल सभी व्यक्तियों का पता लगाया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फ्रॉड आमतौर पर भावनात्मक दबाव और तत्काल लाभ का लालच देकर शिकार तैयार करते हैं। इस मामले में, पीड़ितों की सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

विशेषज्ञों ने चेताया है कि बेरोज़गारों को कभी भी बिना सत्यापन के बड़े पैसों का भुगतान नहीं करना चाहिए, और सरकारी नौकरी के ऑफर के लिए अधिकारिक चैनल और वेबसाइट्स का ही भरोसा करना चाहिए।

कुल मिलाकर, बेंगलुरु का यह मामला एक व्यापक सरकारी नौकरी फ्रॉड नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर पेश करता है। यह न केवल आर्थिक नुकसान बल्कि पीड़ितों के मानसिक और सामाजिक विश्वास पर भी गंभीर प्रभाव डालता है।

संक्षेप में: जेसन डी’सूज़ा और लवीना नामक दंपती ने फर्जी सरकारी नियुक्ति के झांसे में सैकड़ों बेरोज़गारों से ₹25 करोड़ वसूले। CCB मामले की जांच कर पूरे नेटवर्क और पीड़ितों की पहचान कर रही है।

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