नकली दस्तावेजों से गाड़ियों की बिक्री और खरीदारों के नाम पर लोन लेकर रकम हड़पने का आरोप; बैंक कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

‘सेकेंड-हैंड कार के नाम पर बड़ा खेल’: फर्जी लोन रैकेट का खुलासा, ₹21 लाख की संपत्ति के साथ मास्टरमाइंड गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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राजकोट। सेकेंड-हैंड कार बाजार को निशाना बनाकर चलाए जा रहे एक सुनियोजित फर्जी लोन रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसमें आरोप है कि जालसाजों ने नकली दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए न सिर्फ गाड़ियों की अवैध खरीद-फरोख्त की, बल्कि खरीदारों के नाम पर लोन लेकर रकम भी हड़प ली। मामले में 29 वर्षीय आनंद उर्फ अमित खाखर को मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार किया गया है। उसके पास से करीब ₹21 लाख की संपत्ति, जिसमें पांच कारें शामिल हैं, बरामद की गई हैं।

यह मामला तब सामने आया जब कार कारोबारी बकुल राठौड़ ने अपने सहयोगी नयन सावलिया के साथ मिलकर एक गाड़ी ₹2.35 लाख में बेचने का सौदा किया। आरोप है कि आरोपी आनंद ने वाहन के साथ मूल आरसी, ट्रांसफर दस्तावेज और मालिक के पैन व आधार कार्ड की कॉपी हासिल कर ली। इसके बाद उसने बिना जानकारी दिए उसी गाड़ी को तीसरे व्यक्ति को ₹2.82 लाख में बेच दिया और ट्रांसफर पेपर पर मूल मालिक के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए।

जांच में सामने आया कि आरोपी का तरीका बेहद सुनियोजित था। वह सेकेंड-हैंड कार बेचने वालों से संपर्क करता, आरसी बुक की फोटो लेकर उसकी रंगीन नकली कॉपी तैयार करता और फिर असली आरसी अपने पास रख लेता। वाहन मालिकों को नकली दस्तावेज थमाकर वह गाड़ी को आगे बेच देता। इसके बाद खरीदार के नाम पर लोन मंजूर करवाकर रकम अपने खाते में ट्रांसफर करा लेता।

जांच एजेंसियों को शक है कि इस पूरे खेल में कुछ बैंक कर्मियों की भी मिलीभगत हो सकती है। आरोप है कि खरीदारों के नाम पर स्वीकृत लोन की राशि सीधे आरोपी के खाते में पहुंचाई जाती थी, जो बिना अंदरूनी सहयोग के संभव नहीं माना जा रहा। फिलहाल इस पहलू की गहन जांच की जा रही है।

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अब तक पांच कारों को जब्त किया गया है, जिनमें से दो गाड़ियां गुजरात के बाहर से लाई गई थीं। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि इन वाहनों के पास वैध दस्तावेज नहीं थे। अधिकारी अब जब्त गाड़ियों के असली मालिकों की पहचान करने और फर्जी कागजात के स्रोत का पता लगाने में जुटे हैं।

मामले में परिवहन विभाग से भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस रैकेट का दायरा अन्य शहरों या राज्यों तक फैला हुआ है।

कानूनी कार्रवाई के तहत आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—318(4), 336(2), 338 और 340(2)—के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और पूरे रैकेट को ध्वस्त करने की दिशा में काम कर रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल और दस्तावेजी सत्यापन के बढ़ते दावों के बावजूद इस तरह की धोखाधड़ी यह दिखाती है कि सेकेंड-हैंड वाहन बाजार में अभी भी कई कमजोरियां मौजूद हैं। खरीदारों और विक्रेताओं दोनों के लिए यह मामला एक चेतावनी है कि बिना पूरी जांच-पड़ताल के किसी भी लेन-देन में शामिल होना भारी पड़ सकता है।

फिलहाल, इस रैकेट के खुलासे ने वाहन फाइनेंसिंग और सेकेंड-हैंड कार बाजार में पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच की दिशा यह तय करेगी कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का खेल था या इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय है।

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